नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) अभियान के बीच भलस्वा और जीटीबी नगर के पास स्थित दो सरकारी स्कूलों के सभी नियमित शिक्षकों को बूथ लेवल आफिसर (बीएलओ) और उससे जुड़े चुनावी कार्यों में लगा दिया गया है।
इससे इन स्कूलों में नियमित पढ़ाई का संकट खड़ा हो गया है। भलस्वा स्थित इस सरकारी स्कूल में करीब 1,200 छात्र हैं और लगभग 20 नियमित शिक्षक कार्यरत हैं।
इनमें से सभी को एसआइआर ड्यूटी पर भेज दिया गया है। अब 22 सेक्शन की पढ़ाई की जिम्मेदारी केवल 15 अतिथि शिक्षकों पर आ गई है। वहीं, जीटीबी नगर के पास स्थित दूसरे स्कूल के 22 नियमित शिक्षकों को भी बीएलओ ड्यूटी पर लगाया गया है। स्कूल अधिकारियों का कहना है कि अक्टूबर तक यह व्यवस्था जारी रही तो छात्रों की पढ़ाई का नुकसान होना तय है।
लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी
स्कूल अधिकारियों और शिक्षकों का कहना है कि चुनावी कार्य महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इसके लिए किसी एक स्कूल के पूरे स्टाफ को नहीं हटाया जाना चाहिए। उनका सुझाव है कि प्रत्येक स्कूल से अधिकतम एक-दो शिक्षकों को ही चुनावी कार्य में लगाया जाए, ताकि पढ़ाई और चुनाव दोनों कार्य प्रभावित न हों।
भलस्वा स्कूल के नौ शिक्षकों को जारी एसडीएम/इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन आफिसर के आदेश के अनुसार उन्हें वोटर सेंटर और ईआरओ कार्यालयों में डेटा एंट्री, फार्म-6 और फार्म-8 की जांच, ड्राफ्ट मतदाता सूची तैयार करने, क्लेरिकल कार्य और अन्य चुनावी जिम्मेदारियां निभानी होंगी। जरूरत पड़ने पर सामान्य कार्यालय समय के बाद भी काम करना होगा। आदेश में लापरवाही या अनुपस्थिति पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
निदेशालय के अधिकारियों ने इस पर कहा कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि न तो एसआइर अभियान प्रभावित हो और न ही छात्रों की पढ़ाई। उन्होंने कहा कि यदि कहीं ऐसी स्थिति बनी है तो उसे सुधारा जाएगा।
इससे पहले राजकीय विद्यालय शिक्षक संघ (जीएसटीए) ने दिल्ली सरकार को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि हजारों शिक्षकों के चुनावी ड्यूटी पर जाने से लाखों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी। एसोसिएशन ने मांग की है कि एसआइआर ड्यूटी के कारण खाली हुए पदों पर तत्काल अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की जाए, विशेषकर 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के हित में।
सात अक्टूबर तक ड्यूटी चलने की संभावना
एसोसिएशन का कहना है कि यह ड्यूटी सात अक्टूबर तक चलने की संभावना है, जिससे बाद में शैक्षणिक नुकसान की भरपाई मुश्किल होगी। शिक्षा अधिकार कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा कि चुनावी जिम्मेदारियां जरूरी हैं, लेकिन उनकी कीमत बच्चों की शिक्षा नहीं होनी चाहिए।
वहीं शिक्षकों का कहना है कि लगातार बदलती ड्यूटी के कारण छात्रों के सीखने पर सीधा असर पड़ रहा है और उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जबकि इसके लिए शिक्षकों को ही जवाबदेह ठहराया जाता है।
