दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, मिलावटखोरों पर अब लगेगी गंभीर धाराएं

News Desk
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नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर पैसा कमाने की कोशिश करने वाले मिलावटखोरों और जालसाजों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने अब कड़ा रुख अपना लिया है। बाजारों में धड़ल्ले से नकली खाद्य पदार्थ बेचने और एक्सपायरी डेट मिटाकर नया रैपर चढ़ाने वाले सिंडिकेट के खिलाफ पुलिस ने अब मामूली धाराओं के बजाय गंभीर धाराएं लगाकर कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

पहले जहां ऐसे मामलों में केवल कापीराइट एक्ट के तहत ढीली कार्रवाई होती थी, वहीं अब दिल्ली पुलिस आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने जैसी गंभीर और गैर-जमानती धाराएं लगा रही है। इसका असर यह दिख रहा है कि इस काले धंधे में शामिल अपराधियों को कोर्ट से आसानी से जमानत नहीं मिल पा रही है।

15 से ज्यादा बड़े सिंडिकेटों का भंडाफोड़

पुलिस अधिकारी का कहना है कि वैसे तो बाजारों में नकली खाद्य पदार्थों की जांच और उन पर कार्रवाई की प्राथमिक जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा विभाग की है, लेकिन लोगों के स्वास्थ्य पर मंडराते खतरे और लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने मानवीय हित को देखते हुए सख्त कार्रवाई करने का निर्णय किया है। पुलिस खुफिया तंत्र को सक्रिय कर ऐसे सिंडिकेट्स का पता लगाना और उन पर सीधी कार्रवाई करना शुरू कर दिया है।

आंकड़ों को देखें तो दिसंबर से लेकर अब तक की गई ताबड़तोड़ कार्रवाई में दिल्ली पुलिस करीब 15 से अधिक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ कर चुकी है। ये गिरोह गोदामों के भीतर ही नकली सामान बनाने से लेकर नामी कंपनियों के पैकेटों से एक्सपायरी डेट मिटाकर नई तारीख छापने का गंदा खेल खेल रहे थे। इन मामलों में अब तक 24 से ज्यादा आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

पहले कापी राइट एक्ट लगाने से आरोपितों को थाने से ही जमानत मिल जाती थी। आरोपितों को आगे भी जांच मेें शामिल होने के लिए नोटिस देकर छोड़ दिया जाता था। लेकिन अब धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने जैसी गंभीर धाराएं लगाने से आरोपितों को अदालतों से जमानत मिलना मुश्किल हो रहा है।

पुलिस द्वारा केस डायरी में धोखाधड़ी और साजिश की कड़ियों को मजबूती से पेश करने के कारण, पिछले छह महीनों में पकड़े गए सिंडिकेट के मुख्य सरगनाओं और सदस्यों की जमानत याचिकाएं लगातार खारिज हो रही हैं। पुलिस का साफ संदेश है कि लोगों की जान से खेलने वालों को सलाखों के पीछे ही रहना होगा।

पुलिस अधिकारी का कहना है कि नकली सामान को असली बताकर बेचना और एक्सपायरी डेट छिपाकर ग्राहकों को धोखा देने के मामले में दोषी पाए जाने पर सात साल तक की कैद और भारी जुर्माने का प्रविधान है। दस्तावेज या रैपरों में हेरफेर यानी किसी ब्रांड के रैपर पर लिखी तारीख को रसायनों से मिटाना और नई तारीख प्रिंट करना गंभीर जालसाजी की श्रेणी में आता है।

मिलावटखोरी पर लगाम लगाने की पहल

इसमें भी सात साल तक की सजा हो सकती है। आपराधिक साजिश, चूंकि यह पूरा खेल एक संगठित गिरोह (सिंडिकेट) द्वारा मिलकर खेला जाता है, इसलिए सभी आरोपितों पर साजिश रचने की धारा लगाई जाती है। इसके तहत सह-आरोपियों को भी मुख्य अपराधी के बराबर ही सजा भुगतनी पड़ती है। लोगों के स्वास्थ्य को खतरे में डालने के लिए खाद्य सुरक्षा कानून की सख्त धारा भी लगाई जा रही है इसमें उम्रकैद तक की सजा का प्रविधान है।

दिल्ली पुलिस की इस नई रणनीति से साफ है कि राजधानी में नकली और एक्सपायरी सामान बेचने वाले सिंडिकेट की अब खैर नहीं होगी। पुलिस की यह सख्ती त्योहारों और आम दिनों में मिलावटखोरी पर लगाम लगाने में मील का पत्थर साबित होगी।

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