
नोएडा: ग्रेटर नोएडा के परी चौक से दिल्ली के कश्मीरी गेट तक चलती स्लीपर बस में नाबालिग से गैंगरेप के मामले में आरोपियों का डीएनए बस से लिए गए नमूनों से मैच हो गया है। दिल्ली पुलिस ने ड्राइवर और कंडक्टर के खिलाफ 398 पेज की चार्जशीट दाखिल कर दी है। इससे ये जानकारी मिली है।
इस मामले में 51 लोगों को गवाह बनाया गया है। चार्जशीट में कहा गया कि जांच में फॉरेंसिक एविडेंस को अहम आधार बनाया गया है। चार्जशीट में कहा गया है कि दोनों आरोपियों के डीएनए प्रोफाइल पीड़िता के कपड़ों और बस से बरामद किए गए जैविक सैंपल से मैच हुए है। पुलिस ने सीमन और बालों के सैंपल को फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) भेजा था। एफएसएल की रिपोर्ट को चार्जशीट के साथ अटैच किया गया है।
चार अगस्त को हुई थी घटना
वारदात 4 अगस्त की रात हुई थी। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली नाबालिग नोएडा के सेक्टर-63 स्थित अपने रिश्तेदार के घर जाने की कोशिश कर रही थी। वह गलती से ग्रेटर नोएडा के परी चौक पहुंच गई। इस दौरान संबंधित खाली बस में उसे आरोपियों ने नोएडा छोड़ने के नाम पर बैठा लिया। आरोप है कि दोनों ने चलती बस में गैंगरेप किया।
जानिए पुलिस ने क्या धाराएं लगाईं
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्न फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज (पॉक्सो) एक्ट की संबंधित धाराओं में कार्रवाई की है। गैंगरेप, किडनैपिंग, गलत तरीके से बंधक बनाने, कॉमन इंटेंशन के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट और एग्रेवेटेड पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।
18 सितंबर को दाखिल हुई चार्जशीट
पुलिस ने यह चार्जशीट 18 सितंबर को तीस हजारी कोर्ट में दाखिल की थी। इसमें 51 गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं। कोर्ट ने 24 सितंबर को चार्जशीट पर संज्ञान लिया। अब मामले में 7 अक्टूबर को आरोप तय करने को लेकर बहस होगी। इसके बाद केस की आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी।
‘बस से उतरने भी नहीं दिया’
पीड़ित ने बयान में कहा है कि जब उसे पता चला कि बस में कोई दूसरा यात्री नहीं है तो उसने बस से उतरने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि कंडक्टर ने उसे उतरने से रोक दिया। बस ग्रेटर नोएडा से दिल्ली की ओर चलती रही और करीब 47 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद कश्मीरी गेट इलाके में पहुंची। यहां उसे बस से उतारकर छोड़ दिया गया।
सीसीटीवी भी काम नहीं कर रहे थे
जांच में पता चला है कि बस में लगे सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे। परमिट और निर्धारित सेफ्टी रिक्वायरमेंट से जुड़े उल्लघन भी मिले हैं। 11 चालान मिले हैं। पैसेंजर कंपार्टमेंट में भारी पर्दे लगे थे। लिहाजा बाहर से अंदर की गतिविधियां दिखाई नहीं दी। जांच में सामने आया कि ड्राइवर और कंडक्टर को पुलिस वेरिफिकेशन के बिना काम पर रखा गया था।
