
ग्रेटर नोएडा। बढ़ते विकास कार्यों की निगरानी और बेहतर योजना के लिए प्राधिकरण अब प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) बनाएगा। सीईओ रवि कुमार एनजी की मंजूरी के बाद एजेंसी के माध्यम से विशेषज्ञों की तैनाती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बेहतर प्रदर्शन करने पर यूनिट को दो साल का सेवा विस्तार भी दिया जा सकेगा।
95 सेक्टर और 124 गांवों का दायरा
ग्रेटर नोएडा का दायरा लगातार बढ़ रहा है। शहर में करीब 95 सेक्टर और 124 गांव शामिल हैं, जिन्हें आठ अलग-अलग वर्क सर्किल में बांटा गया है।
इतने बड़े क्षेत्र में विकास योजनाओं, निर्माण कार्यों की निगरानी और नई नीतियां तैयार करने के लिए विशेषज्ञों वाली PMU बनाने की जरूरत महसूस की गई है। इसे स्मार्ट सिटी की तर्ज पर तैयार किया जाएगा।
इन कामों पर रहेगा PMU का फोकस
PMU की प्रमुख जिम्मेदारियों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, वायु प्रदूषण प्रबंधन और खेल सुविधाओं का विकास शामिल रहेगा। इसके अलावा संपत्तियों की उच्च बोली के साथ बिक्री व लीज डीड की प्रक्रिया में भी विशेषज्ञ सहायता दी जाएगी।
यूनिट सीवरेज प्रबंधन, अलग-अलग परियोजनाओं की बिड प्रक्रिया और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए बेहतर नीतियों की सिफारिश भी करेगी।
परियोजनाओं की निगरानी में मिलेगी मदद
सीईओ के मुताबिक PMU बनने से कांट्रैक्टर, सेवा प्रदाता एजेंसियों और अधिकारियों के बीच समन्वय बेहतर होगा। इससे परियोजनाओं की निगरानी और खरीद प्रबंधन में प्राधिकरण को पेशेवर और तकनीकी सहायता मिलेगी।
PMU हितधारकों से जुड़ाव में भी मदद करेगी। प्राधिकरण का मानना है कि इससे बुनियादी ढांचे और शहरी विकास को गति मिलेगी और आमजन को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
बेहतर प्रदर्शन पर दो साल विस्तार
विशेषज्ञों की तैनाती एजेंसी के माध्यम से की जाएगी। PMU के प्रदर्शन की समीक्षा के बाद बेहतर काम करने पर इसे दो साल का सेवा विस्तार भी दिया जा सकेगा।
