ग्रेटर नोएडा। अपर सत्र न्यायाधीश सत्येंद्र सिंह ने श्रमिक हिंसा मामले में आरोपित एक्टिविस्ट सत्यम वर्मा को फेज दो कोतवाली में दर्ज मामले में जमानत दे दी। अदालत के सामने पुलिस चार्जशीट में लगाए आरोप ठोस साक्ष्यों के रूप में प्रस्तुत नहीं कर सकी।
पुलिस जिस वाटसअप ग्रुप के माध्यम से श्रमिकों को भड़काने का दावा कर रही थी, उसमें आरोपित का नंबर जुड़े होने और उनके बैंक खाते के रुपयों को श्रमिक हिंसा में उपयोग को लेकर प्रस्तुत साक्ष्य भी अदालत के सामने नहीं टिके।
ठोस साक्ष्यों को पेश करने में पुलिस विफल रही। इन्हीं को आधार मानते हुए अदालत ने उन्हें राहत दी। फिर भी अभी सत्यम की जेल से रिहाई नहीं होगी, दरअसल इसी प्रकरण में दर्ज अन्य मामलों में भी वह आरोपित हैं, जिनमें अभी तक जमानत नहीं मिली है।
क्या है पूरा मामला?
बता दें अप्रैल में हुई श्रमिक हिंसा में फेज-दो कोतवाली में रिचा ग्लोबल फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा दर्ज मामले में सत्यम वर्मा को गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भेजा था। उन पर श्रमिक हिंसा में बलवा, तोड़फोड़ और आगजनी की साजिश के आरोपों से संबंधित धाराएं लगी हैं।
उनके अधिवक्ता की तरफ से क्राइम नंबर 169 में जमानत याचिका दायर की गई थी। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि विवेचना में पुलिस द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह साबित होता है कि आरोपित तोड़फोड़-आगजनी या बलवा में शामिल है। घटना 10 से 13 अप्रैल की है, जबकि सत्यम के खिलाफ 23 अप्रैल को मामला दर्ज किया गया।
देरी का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। उसे 19 अप्रैल को लखनऊ से गिरफ्तार कर फेज-दो कोतवाली में रिमांड बनाकर जेल भेजा गया। कथित घटना में जिस वाट्सअप ग्रुप में श्रमिकों को भड़काने का दावा किया जा रहा है, उसमें उसका नंबर ही नहीं जुड़ा है। सत्यम 12 साल से नोएडा नहीं आया है।
ऐसे में घटना के समय उसकी मौजूदगी के भी कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं। आरोपित के खाते में 1,11,41,697 रुपये विदेशी मुद्रा के रूप में आए हैं। दलील दी कि सत्यम अनुवादक है, वह विदेशी कंपनियों के लिए अनुवाद करता है, जिसके बदले उन्हें विदेशी मुद्रा में आय प्राप्त होती है। उक्त धनराशि 21 वर्षों में मिली है।
पुलिस द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह साबित हो सके कि इन पैसों का इस्तेमाल कथित श्रमिक घटना में हुआ है। आरोपित 61 वर्ष के बुजुर्ग व्यक्ति हैं और शुगर एवं बीपी की गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं। तीन महीनों से जिला कारागार बंद हैं। उनके स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड रहा है। उनके जेल से रिहा होने के बाद भागने या साक्ष्य नष्ट होने का कोई अंदेशा नहीं है। अभियोजन ने तर्क दिया कि सत्यम के खाते से 42 लाख रुपये इसी मामले में आरोपित शिवानी के खाते में ट्रांसफर किए गए हैं।
दूसरे पक्ष ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस धनराशि की लेनदेन से संबंधित कोई ठोस प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। पुलिस ने केस डायरी में ट्रांजेक्शन का पूरा विवरण शामिल नहीं किया है, न ही धन का दुरुपयोग दिखाया गया है।
कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। अभियोजन ने जमानत प्रार्थना पत्र विरोध किया, लेकिन कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। अदालत ने दोनों पक्ष की दलीलें सुनने के बाद 50 हजार रुपये जमानत राशि जमा करने समेत सशर्त सत्यम वर्मा की जमानत मंजूर कर ली। एक अन्य आरोपित
मनीषा चौहान को भी मिली जमानत, लेकिन रिहाई नहीं
फेज-दो कोतवाली में दर्ज श्रमिक हिंसा मामले में आरोपित मनीषा चौहान पर 13 अप्रैल को हुए उग्र श्रमिक आंदोलन के दौरान कई कंपनियों में तोड़फोड़ और नुकसान पहुंचाने का आरोप था। अभियोजन के मुताबिक 100 से 200 उपद्रवी श्रमिक लाठी-डंडे, घातक हथियार और ईंट-पत्थर लेकर सड़कों पर उतर आए थे।
सेक्टर-64, 65, 67, 68 और 69 में यातायात बाधित करने के साथ कई कंपनियों में घुसकर सुरक्षा गेट, सीसीटीवी कैमरे, कांच और कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई। उनकी जमानत पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि जिस घटना को लेकर मनीषा पर आरोप लगाए गए, उस समय वह पहले से जेल में बंद थी।
उसे 11 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था और 12 अप्रैल को जेल भेज दिया गया था। अदालत ने इस तथ्य समेत अन्य परिस्थितियों को देखते हुए उसे भी जमानत दे दी। बता दें कि सत्यम और मनीषा श्रमिक हिंसा में दर्ज अन्य मामलों में भी आरोपित हैं। इसलिए अभी उन्हें जेल में ही रहना होगा।

