गाजियाबाद। शहर में नशे के जाल का खौफनाक असर जघन्य अपराधों के रूप में सामने आ रहा है। बीते चार माह में दो मासूम बच्चियों से दुष्कर्म के बाद हत्या की घटनाओं ने इस खतरे को और गहरा कर दिया है।
दैनिक जागरण की पड़ताल में सामने आया कि जिन स्थानों पर नशेड़ियों का जमावड़ा लगता है, वहां आज भी हालात नहीं बदले हैं। वहीं, राजनगर एक्सटेंशन के निर्माणाधीन माल में सात वर्षीय बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपितों के आसपास रहने वाले कामगारों ने दावा किया कि दोनों युवक अक्सर शराब के साथ ड्रग्स का भी सेवन करते थे।
शाम ढलते ही बन जाता है नशेड़ियों का अड्डा
दैनिक जागरण टीम ने 17 मार्च को नंदग्राम क्षेत्र में हुए तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में घटनास्थल का हाल देखा। कई माह बीतने के बाद भी वहां इंजेक्शन, शराब के खाली पाउच और गांजा पीने में इस्तेमाल होने वाले कागज के पैकेट बिखरे मिले।
स्थानीय लोगों ने बताया कि शाम ढलते ही यहां नशेड़ियों का जमावड़ा लग जाता है। शहर के व्यस्त इलाके पुराने बस अड्डे के आसपास भी बड़ी संख्या में नशीले इंजेक्शन, शराब के पाउच, सिरिंज और नशा करने में इस्तेमाल होने वाला अन्य सामान पड़ा मिला।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह इलाका लंबे समय से नशेड़ियों का ठिकाना बना हुआ है और रात के समय यहां असामाजिक तत्वों की आवाजाही बढ़ जाती है।
शराब और ड्रग्स के आदी थे दोनों आरोपी
राजनगर एक्सटेंशन के निर्माणाधीन माल में काम करने वाले कामगारों ने बताया कि गिरफ्तार दोनों आरोपित अक्सर शराब पीते थे और कई बार ड्रग्स के नशे में भी दिखाई देते थे।
लगातार सामने आ रही घटनाएं यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि आखिर शहर में नशे की आसान उपलब्धता पर प्रभावी अंकुश कब लगेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि नशे के अड्डों को पूरी तरह खत्म करना जरूरी है, तभी ऐसे जघन्य अपराधों पर प्रभावी रोक लग सकेगी।

