तंबाकू छोड़ने में कभी देर नहीं होती, हर उम्र में मिलते हैं स्वास्थ्य लाभ: डॉ. सुधीर गुप्ता

Rohit Kumar
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हर वर्ष 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को तंबाकू के सेवन से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति जागरूक करना है। तंबाकू आज भी दुनिया भर में रोकी जा सकने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में से एक है और यह न केवल धूम्रपान करने वालों को ही नुकसान नहीं पहुंचाता; यह मानव शरीर के लगभग हर अंग को क्षति पहुंचाता है, और उसके आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।

इस अवसर पर डॉ. सुधीर गुप्ता, चेस्ट फिजिशियन एवं स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ, कैलाश अस्पताल, ने कहा कि तंबाकू का सेवन फेफड़ों, हृदय, रक्त वाहिकाओं और शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाता है। धूम्रपान और अन्य तंबाकू उत्पादों का उपयोग फेफड़ों के कैंसर, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सी.ओ.पी.डी.), अस्थमा की जटिलताओं, हृदय रोगों और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।

आज के समय में केवल सामान्य सिगरेट ही नहीं, बल्कि ई-सिगरेट, वेपिंग और अन्य निकोटीन उत्पाद भी युवाओं को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं। कई लोग इन्हें सुरक्षित विकल्प मानते हैं, जबकि वास्तव में ये भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं और निकोटीन की लत को बढ़ावा देते हैं।

तंबाकू छोड़ने का निर्णय किसी भी उम्र में लिया जाए, उसके लाभ तुरंत दिखाई देने लगते हैं। धूम्रपान बंद करने के कुछ ही दिनों में शरीर की कार्यक्षमता बेहतर होने लगती है, जबकि लंबे समय में फेफड़ों और हृदय संबंधी रोगों का जोखिम काफी कम हो जाता है।

तंबाकू छोड़ना चुनौतीपूर्ण अवश्य है, लेकिन सही मार्गदर्शन, दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास के साथ इसे सफलतापूर्वक छोड़ा जा सकता है। तंबाकू सेवन की इच्छा को बढ़ाने वाले कारणों की पहचान करना, उन्हें स्वास्थ्यवर्धक विकल्पों जैसे व्यायाम, योग, ध्यान और सकारात्मक दिनचर्या से बदलना, तथा आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय सहायता और निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एन.आर.टी.) का सहारा लेना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू छोड़ने का कोई एकमात्र उपाय नहीं होता, बल्कि व्यवहार में सकारात्मक बदलाव, परिवार और मित्रों का सहयोग तथा नियमित प्रयास ही सफलता की कुंजी हैं। तंबाकू मुक्त जीवन न केवल फेफड़ों और हृदय को स्वस्थ बनाता है, बल्कि व्यक्ति को बेहतर गुणवत्ता वाला, अधिक सक्रिय और स्वस्थ जीवन जीने का अवसर भी प्रदान करता है।

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Rohit Kumar is a famous Indian journalist and social activist based in Delhi, India. He is also known as “the investigator” and “news creator.” He is the director and chief editor of News India 9. Popular for his TV show “Koi Sataye Hame Bataye,” which creates awareness regarding societal issues and shares inspirational stories from society. The Ministry of Social Justice and Empowerment (Government of India) supports his channel and considers him a star icon.
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