ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में अनोखा खेल: रिटायरमेंट और संविदा खत्म होने के बाद भी कुर्सी पर डटे 8 अफसर!

News Desk
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ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण से एक ऐसा मामला सामने आया जो चर्चा का विषय बना हुआ है। विभिन्‍न विभागों में 8 ऐसे अधिकारी कार्यरत हैं जिनकी सेवा अवधि खत्‍म हो चुकी है। बावजूद इसके वे नियमित रूप से दफ्तर आ रहे हैं और काम कर रहे हैं। कुछ अफसर तो बगैर वेतन के भी काम में जुटे हैं। ऐसे कर्मचारियों के नाम की एक सूची इंटरनेट पर सामने आई है।

इन कर्मचारियों की प्राधिकरण में नियमित सेवा कई महीने पहले ही खत्म हो गई थी। इसके बाद उन्हें संविदा के आधार पर नियुक्त किया गया, लेकिन अब उस संविदा की अवधि भी समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी करते हुए ये अधिकारी और कर्मचारी दफ्तर में बैठकर अपने कार्य निभा रहे हैं। इनमें एक महाप्रबंधक, एक सहायक महाप्रबंधक के अलावा 6 सहायक प्रबंधक और कनिष्ठ सहायक शामिल हैं।

लिस्‍ट में इन अफसरों का नाम शामिल

वायरल हो रही सूची के अनुसार, 7 अक्टूबर को महाप्रबंधक (प्रशासन/सामान्य) विमल किशोर गुप्ता उर्फ वीके गुप्ता और सहायक प्रबंधक (सिविल) रियाजुद्दीन की सेवा अवधि समाप्त हो गई। 9 अक्टूबर को सहायक प्रबंधक आशीष कुमार सिंह, सहायक प्रबंधक (सिविल) अजय कुमार वर्मा, कनिष्ठ सहायक राम प्रसाद शर्मा और सहायक प्रबंधक राजा राम मौर्य का कार्यकाल पूरा हुआ। इसके बाद 12 अक्टूबर को सहायक महाप्रबंधक (प्र./सा.) पुरुषोत्तम दास गुप्ता उर्फ पीडी गुप्ता की संविदा अवधि भी खत्म हो गई। इन सबके कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद उनके द्वारा दफ्तर में कार्य जारी रखा जा रहा है।

चर्चा और चिंता का बना माहौल

इस स्थिति ने यह सवाल उठा दिया है कि आखिर वे बिना पारिश्रमिक के काम क्यों कर रहे हैं। क्या यह उनकी संस्था के प्रति निष्ठा है या इसके पीछे कोई अन्य उद्देश्य छिपा है। मामला सामने आते ही प्राधिकरण में चर्चा और चिंता का माहौल बन गया है। जानकारी के मुताबिक, वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पूरे मामले पर गंभीरता से ध्यान देना शुरू कर दिया है।

शासन को पत्र लिखा जा चुका है: सीईओ रवि कुमार एनजी

इस पूरे मामले में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ रवि कुमार एनजी ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्‍होंने एनबीटी ऑनलाइन को बताया कि प्राधिकरण में जनता की सेवा और समस्याओं के निस्तारण करने के लिए कर्मचारियों और अधिकारियों की कमी है। इस वजह से इन लोगों से काम लिया जा रहा है जिससे आमजन परेशान न हो। इन अधिकारियों व कर्मचारियों को लेकर तीन महीने पहले ही शासन को पत्र लिख कर अवगत करा दिया गया है। शासन से पत्र के जरिये अनुमति भी मांगी गई है कि नई बहाली की जगह पुराने लोगों को ही रख लिया जाए। उम्मीद है कि जल्द ही शासन की ओर से इस मामले में आदेश भी मिल जाएगा।

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