
ग्रेटर नोएडा। नॉलेज पार्क कोतवाली क्षेत्र में नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर मंगलवार शाम डबल डेकर प्राइवेट बस में लगी भीषण आग ने परिवहन व्यवस्था की पोल खोल दी है। गनीमत रही कि सभी 32 सवारियां जिसमें बच्चे महिलाएं व बुजुर्ग भी शामिल थे समय रहते उतर गए अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।
बुधवार को फोरेंसिक टीम और रोडवेज की तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। प्रथम दृष्टया आग इंजन के पास से शुरू हुई। पाइपलाइन फटने के बाद डीजल रिसाव होने से आग फैलने की आशंका है। प्रत्यक्षदर्शियों ने भी इंजन से तरल पदार्थ बहते देखा था।
हादसे के बाद पुलिस को नहीं मिली जानकारी
बस में लगे अग्निशमन उपकरण से आग बुझाने की कोशिश की गई, लेकिन तब तक आग ने रौद्र रूप ले लिया था। सबसे बड़ा सवाल यह है कि हादसे के बाद भी पुलिस को कोई शिकायत नहीं मिली। पुलिस खुद ही संज्ञान लेकर मामले की जांच में जुटी है। सभी यात्रियों को गंतव्य भेजने के बाद बस में कपड़ों के अलावा और क्या ज्वलनशील सामान लदा था, इसकी भी जांच की जा रही है।
स्लीपर और डबल डेकर बसें बनी हुई हैं मालवाहक
यह घटना अकेली नहीं है। दिल्ली के सदर बाजार से थोक में सस्ता माल खरीदकर व्यापारी टैक्स चोरी के लिए मालवाहक ट्रकों की जगह प्राइवेट स्लीपर और डबल डेकर बसों में ठूंस-ठूंस कर ले जाते हैं। सूत्रों की माने तो यात्रियों की सीटों के नीचे, डिक्की और छत पर कपड़े, खिलौने ही नहीं, बल्कि दीवाली के सीजन में आतिशबाजी और अन्य विस्फोटक सामग्री तक लादी जा रही है।
आरटीओ, परिवहन विभाग और अन्य जिम्मेदार विभागों की मिलीभगत से एक्सप्रेसवे पर ये ओवरलोड, बिना फिटनेस वाली बसें सरेआम दौड़ रही हैं। न चेकिंग, न कार्रवाई। जब तक बस जल नहीं जाती, सिस्टम जागता नहीं। डीजल रिसाव से लगी यह आग सिर्फ तकनीकी फेलियर नहीं, बल्कि उस लापरवाह व्यवस्था की नाकामी है जो यात्रियों की जान को माल के लालच के साथ एक ही बस में ढो रही है।
‘फोरेंसिक टीम और रोडवेज की तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की है। प्रथम दृष्टया आग इंजन के पास से शुरू हुई। पाइपलाइन फटने के बाद डीजल रिसाव होने से आग फैलने की आशंका है। अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है पुलिस स्वत: संज्ञान लेकर मामले की जांच कर रही है।’
-विनोद कुमार, नालेज पार्क कोतवाली प्रभारी
