नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक को एक विधवा पेंशनधारक से वसूली गई लाखों रुपये की राशि वापस करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि अतिरिक्त पेंशन का भुगतान बैंक की प्रशासनिक त्रुटि के कारण हुआ था और इसमें महिला की कोई गलती या धोखाधड़ी शामिल नहीं थी।
न्यायमूर्ति संजीव नरूला की पीठ ने इंद्रा नाम की महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए एसबीआई को 3.6 लाख रुपये की कटौती गई रकम 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने बैंक को भविष्य में भी किसी प्रकार की वसूली करने से रोक दिया।
मामले में बताया गया कि महिला के पति, जो सरकारी कर्मचारी थे, का वर्ष 2003 में निधन हो गया था। इसके बाद उन्हें परिवारिक पेंशन मिल रही थी। बाद में बैंक ने पेंशन रिकॉर्ड में गलत तारीख दर्ज होने का हवाला देते हुए अधिक भुगतान की बात कही और महिला की पेंशन से हर महीने कटौती शुरू कर दी।
महिला ने अदालत में दलील दी कि अतिरिक्त भुगतान में उसकी कोई भूमिका नहीं थी और बैंक ने बिना पूर्व सूचना के राशि काटना शुरू कर दिया। अदालत ने माना कि महिला को इस कथित अतिरिक्त भुगतान की जानकारी होने का कोई प्रमाण नहीं है।
हाई कोर्ट ने कहा कि बैंक ने पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती और बिना उचित जानकारी दिए वसूली शुरू करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। अदालत ने बैंक की कार्रवाई को अनुचित बताते हुए राहत प्रदान की।
