
नोएडा में महर्षि आश्रम की कीमती जमीन को लेकर हुए अरबों के जमीन घोटाले के मामले में ईडी की जांच तेज होने के बाद नोएडा प्राधिकरण, जिला प्रशासन और पुलिस के द्वारा भी इस मामले की गोपनीय रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इस गोपनीय रिपोर्ट में दो राजनीतिक दलों से जुड़े आधा दर्जन से अधिक वरिष्ठ नेताओं के नामों का भी उल्लेख होने का दावा है।
ईडी की टीम इस मामले में प्राधिकरण के अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी जांच कर रही है। इस मामले में तेज हुई जांच को भाजपा नेताओं के बीच चल रही आपसी गुटबाजी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। दावा है कि जांच एजेंसियो को राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों ने भी साक्ष्य उपलब्ध कराएं हैं।
महर्षि आश्रम में हुए अरबों रुपये के जमीन घोटाले के मामले में ईडी ने नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों से भी पूछताछ शुरू कर दी है। ईडी के अधिकारी इस मामले में प्राधिकरण से रिकॉर्ड पहले ही ले चुके हैं। ईडी के अलावा अन्य विभाग भी जांच कर रहे हैं। इस मामले की शिकायत नोएडा प्राधिकरण, प्रदेश सरकार और केन्द्र सरकार के साथ ही ईडी और सीबीआई से भी हुई थी।
ईडी की जांच में सामने आया था कि महर्षि आश्रम की कुछ जमीनें स्पिरिचुअल रिजनेरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया ट्रस्ट के नाम पर है। इसी ट्रस्ट का फर्जी कोषाध्यक्ष बनकर रामचन्द्र मोहन नाम के एक व्यक्ति ने इस पूरे घोटाले की नींव डाली। रामचन्द्र मोहन तथा उसके सहयोगी आकाश मालवीय को ईडी गिरफ्तार कर चुकी है। इनसे हुई पूछताछ में कुछ अन्य प्रमुख जानकारी और घोटालों में शामिल रहे अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं। इस घोटाले में नोएडा प्राधिकरण की भूमिका और कार्यप्रणाली को लेकर भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसी का मानना है कि नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों से सांठगांठ के बिना न तो इस जमीन की बिक्री हो सकती थी और ना ही वहां पर अवैध रूप से कई-कई मंजिलों की इमारतें बनकर उनकी बिक्री हो सकती है। प्राधिकरण के अधिकारियों से भी इस मामले में पूछताछ की जा चुकी है।
इस बार यूपी विधानसभा चुनाव में भी महर्षि आश्रम का मामला एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। जिसको लेकर राजनीतिक दलों के नेता भी तैयारी में जुटे हैं। जिसे देखते हुए इस प्रकरण में नोएडा प्राधिकरण, पुलिस और प्रशासन के द्वारा भी इस प्रकरण में गोपनीय रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जा रही है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस रिपोर्ट ने कई नेताओं की नींद उड़ा दी है। दावा है कि इस रिपोर्ट में गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद जिले से जुड़े दो प्रमुख राजनीतिक दलों के आधा दर्जन से अधिक नेताओं के नाम हैं।
प्राधिकरण ने 44 लोगों को चिन्हित किया
महर्षि आश्रम के आस-पास की अरबों की जमीन पर फ्लैट बनाकर बेचे गए और बड़ी संख्या में लोगों को ठगा गया। प्राधिकरण ने यहां पर होने वाले अवैध निर्माणों को लेकर अनेक बार दिखाावटी कार्रवाई करते हुए वहां पर बोर्ड लगाए, नोटिस जारी किए और निर्माण कार्यों को रोकने के लिए शिफ्ट वार अधिकारियों की बड़ी टीम तैनात करने का दावा भी किया। फिर भी वहां पर रात-दिन निर्माण जारी रहा।
एसआईटी भी मामले की जांच कर रही
एसआरएफ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (महर्षि महेश योगी संस्थान) के श्रीकांत ओझा द्वारा दायर अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के मुख्य सचिव की निगरानी में एसआईटी की जांच का आदेश दिया था। एसआईटी की जांच भी चल रही है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि महर्षि आश्रम से जुड़ी अलग-अलग नौ संस्थाएं हैं। इन संस्थाओं के द्वारा समय-समय पर जमीन की बिक्री की गई।
33 करोड़ की जमीन 16 करोड़ रुपये में बेची गई
ईडी की जांच में सामने आया था कि आरोपियों ने फर्जी प्राधिकरण लेटर, नकली बोर्ड रेजोल्यूशन और जाली मुहरों का इस्तेमाल कर ट्रस्ट की संपत्तियों को बेचा। दिसंबर 2025 में नोएडा के गेझा तिलपताबाद गांव स्थित 3.3610 हेक्टेयर जमीन, जिसका सर्किल रेट करीब 33.61 करोड़ रुपये था, उसे सिर्फ 16 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। ईडी ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया था।
एक खरब, 63 अरब की जमीन पर कब्जा
सीएजी ने भी वर्ष 2021 तक नोएडा में सरकारी जमीन पर हो रखे कब्जे की जांच की थी। सीएजी रिपोर्ट के तहत ही नोएडा में 45 लाख 26 हजार 464 वर्ग मीटर जमीन पर अतिक्रमण है। इसकी अनुमानित कीमत एक खरब, 63 अरब 85 करोड़ से अधिक है। सीएजी की यह रिपोर्ट अधिकारियों के सर्वे पर कागजी रिकॉर्ड के तौर पर है।
