दिल्ली पुलिस का नार्को-टेरर मॉड्यूल पर बड़ा एक्शन, अर्श डल्ला के 4 गुर्गे गिरफ्तार; कई राज्यों में छापेमारी

News Desk
4 Min Read

नई दिल्ली। देश की सुरक्षा के लिए नासूर बन चुके अंतरराष्ट्रीय नार्को-टेरर माड्यूल के खिलाफ दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब समेत अन्य राज्यों में छापेमारी कर रही है।

रविवार को क्राइम ब्रांच ने कनाडा में छिपे आतंकी अर्श डल्ला माड्यूल के चार गुर्गों सिमरनजीत सिंह, हरदीप सिंह, यादविंदर सिंह और जीवन सिंह को गिरफ्तार किया था। इनसे पूछताछ के आधार पर क्राइम ब्रांच इस माड्यूल से जुड़े अन्य गुर्गों को पकड़ने में जुटी हुई है। पुलिस अधिकारी का दावा है कि जल्द ही कुछ गुर्गे दबोच लिए जाएंगे।

डीसीपी हर्ष इंदौरा का कहना है कि विगत कुछ महीनों में आइएसआइ के कई गुर्गां के पकड़े जाने व उनसे पूछताछ में जांच एजेंसियों को पता चला है कि आइएसआइ, खालिस्तानी आतंकी और विदेश में छिपे गैंग्सटरों का गठजोड़ भारत के खिलाफ खतरनाक नार्को-जिहाद और ड्रग्स के बदले हथियार की बड़ी साजिश रच रहा है ताकि देश में आतंकी वारदात कराई जा सके।

अर्श डल्ला के गुर्गे, राजस्थान से अफीम खरीदकर फर्जी केवाईसी दस्तावेज के जरिए कूरियर पार्सल तैयार करता था। पार्सल में ऊपर खाने-पीने का सामान और नीचे फाल्स बाटम बनाकर उसके अंदर अफीम छिपा दी जाती थी। बरनाला का रहने वाला हरदीप सिंह अर्श डल्ला माड्यूल का ”आपरेशनल कोआर्डिनेटर” था।

वह कनाडा में बैठे आतंकी अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला से सिग्नल व वाट्सएप पर संपर्क में रहता था। भारत की तुलना में कनाडा में अफीम की कीमत कई गुना अधिक (करोड़ों रुपये) है।

वहां अफीम बेचकर मिलने वाले पैसों का इस्तेमाल कनाडा में आतंकी नेटवर्क फैलाने और भारत-विरोधी गतिविधियों की फंडिंग के लिए किया जा रहा था इससे पहले भी क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल द्वारा पाकिस्तानी गैंग्सटर शहजाद भट्टी माल के गुर्गों को दबोचा जा चुका है।

आइएसआइ, भट्टी के नाम पर पंजाब और राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन के जरिए हेरोइन और विदेशी हथियारों की खेप गिराता है। यह पूरा नेटवर्क ”ड्रग्स के बदले हथियार” चक्र पर काम कर रहा है। भारत से ड्रग्स (अफीम/हेरोइन) विदेश भेजी जाती है और सीमा पार से प्राप्त भी की जाती है।

इससे होने वाली अवैध कमाई का बड़ा हिस्सा विदेशी आकाओं और आइएसआइ तक पहुंचता है। इस रकम के बदले ड्रोन के जरिए पंजाब-दिल्ली में आधुनिक हथियार, ग्रेनेड और कारतूस गिराए जाते हैं। इन हथियारों का इस्तेमाल देश के भीतर टारगेट किलिंग, रंगदारी और दहशत फैलाने में किया जाता है।

पुलिस अधिकारी का कहना है कि आइएसआइ व खालिस्तानी आतंकी इंटरनेट मीडिया के जरिये युवाओं को अपने झांसे में फंसा रहा है। सीमावर्ती राज्यों में नशे का जाल फैलाकर युवाओं को बर्बाद किया जा रहा है।

स्थानीय अपराधियों और गैंग्सटरों को सीधे विदेश में बैठे खालिस्तानी व पाकिस्तानी आतंकियों से हथियार और फंड मिल रहे हैं। फर्जी दस्तावेज क्रिप्टो-करेंसी और एन्क्रिप्टेड प्लेटफार्म्स के कारण पुलिस काे इनके वित्तीय लेनदेन को ट्रैक करना जटिल हो जाता है।

Share This Article
Leave a Comment