नई दिल्ली। उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आइबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या देश की सबसे खौफनाक और दिल दहला देने वाली वारदातों में गिनी जाती है। अब जब अदालत ने इस मामले में आरोपितों को दोषी करार दिया है, तो उस दिन की भयावह कहानी एक बार फिर लोगों के जेहन में ताजा हो गई है।
25 फरवरी 2020 को दंगों के बीच अंकित शर्मा अपने घर से कुछ ही दूरी पर थे। इलाके में तनाव चरम पर था और चारों ओर हिंसा फैली हुई थी। इसी दौरान उन्हें उग्र भीड़ ने घेर लिया।
पोस्टमार्टम में मिले 50 से ज्यादा जख्म
आरोप है कि भीड़ उन्हें जबरन खींचकर चांद बाग पुलिया के पास ले गई, जहां उन पर चाकू, सरियों और डंडों से ताबड़तोड़ हमला किया गया। हमले की बर्बरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पोस्टमार्टम में उनके शरीर पर 50 से अधिक गहरे जख्म पाए गए।
लगातार किए गए वारों से उनके शरीर के कई अंग क्षतिग्रस्त हो गए थे। हत्या के बाद हमलावरों ने सबूत मिटाने की कोशिश में उनके शव को नाले में फेंक दिया। देर रात तक घर नहीं लौटने पर स्वजन ने उनकी तलाश शुरू की।
नाले में मिला था शव
अगले दिन काफी खोजबीन के बाद उनका शव नाले से बरामद हुआ, जिसे देखकर हर कोई सिहर उठा। पुलिस जांच में सामने आया कि अंकित शर्मा को निशाना बनाकर भीड़ ने घेरकर हमला किया था।
चार्जशीट में भी उल्लेख है कि उन्हें पकड़कर बेरहमी से पीटा गया और धारदार हथियारों से कई बार वार किए गए। अंकित शर्मा हत्याकांड ने उस हिंसा की क्रूरता को उजागर किया और पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया था।
