ग्रेटर नोएडा: यमुना सिटी के दो हजार हेक्टेयर जमीन पर सिविल एविएशन इंडस्ट्री लगेगी। इस जमीन का लैंडयूज इसके अनुरूप कर दिया गया है। यहां पर देश-विदेश की सिविल एविशन सेक्टर की बड़ी कंपनियों को लाने की तैयारी है।
यमुना अथॉरिटी एरिया में नोएडा एयरपोर्ट प्रॉजेक्ट के लिए तीन चरणों में करीच पांच हजार हेक्टेयर जमीन खरीदी जा रही है। दो चरणों में 1334 और 1365 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण हो चुका है। तीसरे चरण में 2053 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण चल रहा है। यह भी पूरा होने के करीब है।
एक रनवे के साथ चल रहा संचालन
पहले चरण में अधिग्रहीत की गई जमीन पर बीते 15 जून से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन शुरू हो गया है। एक रनवे के साथ यह संचालन चल रहा है। यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ ही इस फेज में एक और रनवे बनाया जाएगा। दूसरे और तीसरे चरण में खरीदी गई जमीन पर यात्री सुविधाओं के साथ मेटीनेंस रिपेयरिंग एंड ओवरहालिंग (एमआरओ) हब विकसित किया जाएगा।
दो हजार हेक्टेयर जमीन का मास्टर प्लान सिविल एविएशन हव के लिए तय कर दिया गया है। इस जमीन पर सिविल एविएशन से संबंधित गतिविधियां हो सकेंगी।
शैलेंद्र भाटिया, नोडल अफसर, नोएडा एयरपोर्ट
कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियां भी होंगी
विमानों की मरम्मत होगी तो उसके कलपुर्जे की जरूरत पड़ेगी। इसलिए विमानों के कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियों को भी लाने की जरूरत पड़ेगी। इसको देखते हुए यमुना अथॉरिटी ने एयरपोर्ट प्रॉजेक्ट के साथ लगती करीब दो हजार हेक्टेयर जमीन सिविल एविएशन हब के लिए आरक्षित की है। 2041 के मास्टर प्लान में भी इसका प्रावधान कर दिया गया है। इस हब में देश-दुनिया के बड़ी कपनियों को लाने की प्लानिंग है। ताकि नोएडा एयरपोर्ट के पास विमानों के संचालन से लेकर मरम्मत तक का काम हो सके।
