नोएडा। दिल्ली में इमारत गिरने के हादसे के बाद नोएडा प्राधिकरण ने गांवों में जर्जर और असुरक्षित मकान एवं भवनों का सर्वे कराना शुरू कर दिया है। सर्वेक्षण के दौरान जिन भवनों की स्थिति खतरनाक पाई गई है, वहां नोटिस चस्पा किए जा रहे हैं।
भवन मालिकों और निवासियों को मकान खाली करने के लिए एक से दो सप्ताह का समय दिया जा रहा है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि यदि भवन में रहने के दौरान कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होगी।
प्राधिकरण इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगा। प्राधिकरण ने वर्ष 2019 में भी जर्जर भवनों का सर्वेक्षण किया था। लगभग 1757 इमारतों को असुरक्षित चिह्नित किया गया था, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी थी।
इस बार प्राधिकरण ने नोटिस के साथ भवन खाली कराने पर जोर दिया है। गांवों के अलावा सेक्टर-31 में 128 ईडब्ल्यूएस फ्लैट को भी जर्जर स्थिति के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।
नोटिस चस्पा कर भवन खाली कराने की तैयारी
प्राधिकरण अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी ने बताया कि जिन भवनों पर नोटिस चस्पा किए गए हैं, उन्हें खाली कराया जाएगा। नोटिस की एक प्रति पुलिस विभाग को भी भेजी जा रही है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर भवन खाली करवाकर लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजा जा सके।
81 गांवों में जर्जर भवनों की हो रही पहचान
नोएडा प्राधिकरण 10 वर्क सर्किल में विभाजित है, जिनमें 81 गांव शामिल हैं। सभी सर्किल अधिकारियों को अपने क्षेत्र में जर्जर भवनों की पहचान और कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सदरपुर, निठारी, ममूरा, सलारपुर और भंगेल जैसे घनी आबादी वाले गांवों में सर्वे चल रहा है। मामूरा गांव में अब तक नौ भवनों पर जर्जर होने का नोटिस चस्पा किया जा चुका है।
इन मकानों में लोग अभी भी रह रहे हैं। नोटिस में तत्काल भवन खाली करने का निर्देश दिया गया है, ताकि दुर्घटनाओं और जनहानि को रोका जा सके।
2019 के सर्वे में 1757 इमारतें मिली थीं जर्जर
वर्ष 2019 के सर्वे के हिसाब से जर्जर इमारतों की स्थिति :
- प्राधिकरण सर्वे में चिह्नित जर्जर : 1757
- जर्जर व असुरक्षित : 56
- तीन मंजिला से अधिक इमारत : 1326
- अधिसूचित व अर्जित क्षेत्र में बहुमंजिला इमारतों की संख्या : 114
- ध्वस्तीकरण के आदेश के बावजूद खड़ीं : 114
4 वर्ष में 25 से ज्यादा मौत
जिले में पिछले चार वर्ष में सात से अधिक बड़े हादसों में 25 से अधिक लोगों की मौत हुई है। सभी मामलों में जिला प्रशासन, नोएडा प्राधिकरण के अलावा स्थानीय पुलिस ने भी जांच की, लेकिन दोषियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो सकी है।
इससे समय-समय पर हादसों में लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। हालांकि ती वर्ष में नोएडा में इमारत ढहने से नहीं हादसों में मौत हुई। आग बुझाते वक्त दो फायरमेन की दीवार गिरने से मौत हो गई। एक व्यक्ति की इमारत से प्लास्टर गिरने से मौत हुई।
