नई दिल्ली। आतंकी फंडिंग से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह ने अपने पक्ष में दलीलें पेश कीं। उन्होंने अदालत को बताया कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर वे देश के कई पूर्व प्रधानमंत्रियों के संपर्क में रहे हैं और विभिन्न दौर में उनसे बातचीत कर चुके हैं।
जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से कहा कि वह आरोपी से जुड़े भाषणों और अन्य प्रासंगिक सामग्री अदालत के समक्ष रखे। अदालत यह जानना चाहती है कि शाह के सार्वजनिक वक्तव्यों और आरोपों के बीच क्या संबंध है।
शब्बीर शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोन्साल्वेस ने कहा कि उनके मुवक्किल का नाम कभी भी हिंसक गतिविधियों से नहीं जुड़ा रहा। उन्होंने दावा किया कि शाह ने न तो पत्थरबाजी को बढ़ावा दिया और न ही किसी तरह की हिंसा के लिए लोगों को उकसाया। वकील ने यह भी बताया कि शाह ने कश्मीर समस्या के समाधान को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्रियों से संवाद किया था और इसके प्रमाण के रूप में तस्वीरें और दस्तावेज उपलब्ध हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पूछा कि शब्बीर शाह किन-किन राजनीतिक हस्तियों से मिले थे। इस पर बचाव पक्ष ने बताया कि रिकॉर्ड में कई पूर्व प्रधानमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों के साथ उनकी मुलाकातों के साक्ष्य मौजूद हैं।
अधिवक्ता ने शाह की उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए जमानत की मांग की और सुझाव दिया कि राहत मिलने की स्थिति में उन पर सख्त शर्तें लगाई जा सकती हैं। अदालत ने कहा कि यदि निर्धारित तिथि तक सुनवाई पूरी नहीं होती है, तो जमानत से जुड़े पहलू पर आगे विचार किया जाएगा।
