नई दिल्ली: आईआईटी दिल्ली में एमएससी फिजिक्स के दूसरे वर्ष के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद छात्रों के अकादमिक दबाव और संस्थागत व्यवस्था को लेकर विवाद गहरा गया है. 22 अगस्त को लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स की छठी मंजिल से गिरने के बाद ऋषिकेश की मौत हो गई थी. घटना के विरोध में रविवार को जेएनयू छात्रसंघ (JNUSU) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने आईआईटी दिल्ली के नंबर पांच गेट पर प्रदर्शन किया.
वहीं, जेएनयू छात्रसंघ (JNUSU) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया कि छात्र किन अकादमिक और प्रशासनिक परिस्थितियों से गुजर रहा था. छात्र संगठनों ने प्रदर्शन कर घटना की जांच और संस्थान में छात्रों के लिए सुरक्षित एवं जवाबदेह अकादमिक माहौल सुनिश्चित करने की मांग उठाई. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मामले को केवल एक व्यक्तिगत घटना के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि छात्र की अकादमिक स्थिति, प्रोजेक्ट, मूल्यांकन और संस्थान में मौजूद सहायता व्यवस्था की भी जांच होनी चाहिए.
केवल शोक जताना पर्याप्त नहीं
जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कहा कि देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई और शोध के दौरान छात्रों को कई तरह के अकादमिक दबाव का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि ऋषिकेश की मौत के बाद केवल शोक जताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन परिस्थितियों की भी जांच जरूरी है. उन्होंने कहा कि यदि किसी छात्र के अकादमिक काम या प्रोजेक्ट में लगातार बाधाएं आती हैं और उसे अपने भविष्य को लेकर कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है तो यह भी तय किया जाना चाहिए कि ऐसी स्थिति के लिए जवाबदेही किसकी है. उन्होंने कहा कि संस्थानों की जिम्मेदारी है कि छात्रों को सुरक्षित, सहयोगी और बेहतर अकादमिक वातावरण मिले.
ऋषिकेश को अकेली घटना न माना जाए
जेएनयू छात्रसंघ ने ऋषिकेश की मौत को व्यापक अकादमिक व्यवस्था के संदर्भ में देखने की मांग की है. अदिति मिश्रा ने रोहित, पायल, दर्शन और अनीता समेत कई छात्रों का जिक्र करते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों से जुड़ी ऐसी घटनाएं अकादमिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं. उन्होंने विज्ञान विषयों के छात्रों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि कोर्सवर्क, प्रोजेक्ट, शोध और मूल्यांकन से जुड़ी परेशानियों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए. यदि कोई छात्र लगातार अकादमिक कठिनाइयों से गुजर रहा है तो संस्थान को यह भी देखना चाहिए कि उसके पीछे क्या कारण हैं.
AISA ने भी उठाए संस्थागत व्यवस्था पर सवाल
आईआईटी दिल्ली में छात्र की मौत को लेकर आइसा ने भी प्रशासन से कई सवाल किए हैं. संगठन का दावा है कि ऋषिकेश कुमार की मौत इस वर्ष आईआईटी दिल्ली में छात्र की दूसरी मौत है. आइसा ने कहा कि इसलिए केवल घटना की जांच ही नहीं, बल्कि संस्थान में छात्रों के सामने आने वाली अकादमिक और प्रशासनिक समस्याओं की भी समीक्षा होनी चाहिए.
काउंसलिंग व्यवस्था की पहुंच पर भी सवाल
आइसा ने आईआईटी दिल्ली की काउंसलिंग व्यवस्था की पारदर्शिता और छात्रों तक उसकी वास्तविक पहुंच की समीक्षा की मांग की. संगठन का कहना है कि केवल काउंसलिंग सुविधा होना पर्याप्त नहीं है. यह भी देखा जाना चाहिए कि जरूरत के समय छात्र इस सुविधा तक आसानी से पहुंच पा रहे हैं या नहीं. इसके साथ ही संगठन ने शोध परियोजना, मूल्यांकन, सेमेस्टर और अन्य अकादमिक फैसलों में पारदर्शिता बढ़ाने की मांग की है. शिक्षकों और सुपरवाइजरों के विवेकाधिकार से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा की मांग की गई है.
