नई दिल्ली – अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने इस प्रकरण में लंबे समय से जेल में बंद आरोपी आद्या प्रसाद तिवारी को जमानत देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि मुकदमे के जल्द पूरा होने की संभावना नहीं दिख रही है, ऐसे में आरोपी को लगातार हिरासत में रखना उचित नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि मामले की सुनवाई अभी लंबी चल सकती है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आरोपी की भूमिका को देखते हुए उसे ट्रायल के दौरान जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होता है, तो निचली अदालत को जमानत रद्द करने का पूरा अधिकार होगा।
गौरतलब है कि महंत नरेंद्र गिरि का शव सितंबर 2021 में प्रयागराज स्थित बाघंबरी मठ में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था, जिससे देशभर में सनसनी फैल गई थी। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच एजेंसी ने दावा किया था कि महंत गिरि कुछ लोगों के कारण मानसिक दबाव में थे और इसी तनाव के चलते उन्होंने आत्मघाती कदम उठाया।
इस मामले में पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस फैसले को पलटते हुए जमानत मंजूर की। आरोपी सितंबर 2021 से न्यायिक हिरासत में था।
सीबीआई की चार्जशीट में आनंद गिरि, आद्या प्रसाद तिवारी और संदीप तिवारी पर आत्महत्या के लिए उकसाने और आपराधिक साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी।

