नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट जंतर-मंतर पर कॉकरोच पार्टी की ओर से जारी प्रदर्शन में जुटे प्रदर्शनकारियों का लगातार पुलिस कैमरे से निगरानी को चुनौती देने वाली नयी याचिका दाखिल करने की सलाह दी है. चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर और डाटा प्रोटेक्शन एक्ट की पड़ताल कर नयी याचिका दाखिल करनी चाहिए. मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी.
आज जब मामले को सुनवाई के लिए पुकारा गया तो याचिकाकर्ता की ओर से सुनवाई टालने की मांग की गई. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि इस मामले में दलीलें रखने के लिए वरिष्ठ वकील नंदिता राव किसी दूसरी कोर्ट में व्यस्त हैं. इस पर एएसजी चेतन शर्मा ने कहा कि इससे जुड़े दूसरे मामलों पर 11 सितंबर को सुनवाई होनी है. तब कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को हमने सुझाव दिया था कि वो एक बेहतर याचिका दाखिल करें.
बता दें कि 27 जुलाई को सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश एएसजी चेतन शर्मा ने कहा था कि अब विरोध प्रदर्शन खत्म हो गया है और कोई निगरानी नहीं हो रही है, इसलिए याचिका पर सुनवाई का अब कोई मतलब नहीं है. तब याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील नंदिता राव ने कहा था कि हमारी मांग अभी कायम है और वो निगरानी को गैरकानूनी घोषित करने की मांग कर रही हैं. तब कोर्ट ने कहा था कि आप बेहतर याचिका दायर कीजिए और दिशानिर्देश की मांग कीजिए. अगर सरकार के पास कोई मेकानिज्म होगा तो वे बताएंगे और हम आदेश जारी करेंगे.
इसके पहले केंद्र सरकार ने निगरानी का बचाव करते हुए कहा था कि सार्वजनिक स्थानों पर निजता की मांग हास्यास्पद है. तब याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि निजता के अधिकार सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान भी है. याचिका जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष ने दायर किया है. याचिका में जंतर-मंतर पर कॉकरोच पार्टी की ओर से जारी प्रदर्शन में जुटे प्रदर्शनकारियों का लगातार पुलिस कैमरे से निगरानी को चुनौती दी गई है. वकील सुभाष चंद्रन और अनिरुद्ध केपी के जरिये दायर याचिका में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर पर बैठे प्रदर्शनकारियों पर स्थायी सर्विलांस कैमरे से लगातार नजर रखी जा रही थी.
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने महिला प्रदर्शनकारियों के वीडियो उस हालत में भी बनाए जब भारी बारिश के दौरान वे भींगी हुई थीं और जंतर-मंतर पर छिपने की कोई जगह नहीं थी. ऐसा करना शारीरिक निजता और गरिमा का घोर उल्लंघन है. याचिका में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस से बार-बार ये पूछा गया कि लगातार नजर रखने का अधिकार किसने दिया या किस कानूनी प्रावधान से वे ऐसा कर रहे हैं तो उसका कोई जवाब नहीं दिया गया. याचिका में निजता के अधिकार पर जस्टिस केएस पुट्टास्वामी के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया गया है. याचिका में कहा गया है कि ऐसा कर दिल्ली पुलिस संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन कर रही है.

