गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन में बिल्डर प्रोजेक्ट में फ्लैट और दुकानों की बुकिंग के नाम पर 40 निवेशकों से 30.56 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े की जांच में बड़ा पर्दाफाश हुआ है। पुलिस जांच में पता चला है कि निवेशकों से जिन बैंक खातों में रकम जमा कराई गई थी, वहां से धनराशि दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
अब तक की जांच में करीब 40 बैंक खातों का पता चला है, जिनमें करीब 25 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। निवेशकों से ठगे गए 30.56 करोड़ रुपये में करीब पांच करोड़ रुपये अलग-अलग बुकिंग में नकदी में भी लिए गए थे।
बड़ी मात्रा में नकद निकासी के मिले सबूत
जिन खातों में रुपये आरोपितों ने ट्रांसफर किए उनसे बड़ी मात्रा में नकद निकासी होने के भी साक्ष्य मिले हैं। दूसरी ओर, राजनगर एक्सटेंशन स्थित एएसआर सेंट्रल एवेन्यू परियोजना पर पीड़ित निवेशकों का धरना सोमवार को लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा।
एसआइटी की जांच में सामने आया है कि निवेशकों से फ्लैट और दुकानों की बुकिंग के नाम पर जमा कराई गई रकम मूल खातों में नहीं रुकी।
जांच में यह भी सामने आया है कि धनराशि कई अन्य बैंक खातों में भेजने के बाद नकद के रूप में निकाल ली गई। अब पुलिस इन खातों के संचालकों और लाभार्थियों की पहचान कर रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही हैं कि धनराशि किन-किन लोगों तक पहुंची और उसका अंतिम उपयोग कहां हुआ।
पूरे मामले में पुलिस मुख्य आरोपित दीपक शर्मा उर्फ नितिन शर्मा की भूमिका को सबसे अहम मानकर जांच कर रही है।
एसआइटी यह भी खंगाल रही है कि एएसआर रियलटेक लिमिटेड के निदेशक संदीप कुमार गुप्ता और राइट अर्थ इंफ्रा एलएलपी के निदेशक वरुण मक्कड़ की इसमें क्या भूमिका रही। क्योंकि दोनों बिल्डरों ने पुलिस को बताया है कि निवेशकों की रकम उनके खातों में नहीं आई।
ऐसे में पुलिस बैंक खातों के लेनदेन, दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर दोनों बिल्डरों तथा दीपक शर्मा उर्फ नितिन शर्मा के बीच संभावित मिलीभगत की पड़ताल कर रही है।
लगातार तीसरे दिन निवेशकों का धरना जारी
धरने पर बैठे निवेशकों का कहना है कि जब तक आरोपितों की गिरफ्तारी और धनराशि की रिकवरी की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं होगी, उनका आंदोलन जारी रहेगा। उनका आरोप है कि करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के बाद भी कई दिन बाद केस दर्ज नहीं किया गया है।
इससे आरोपित खुले घूम रहे हैं। इस मौके पर विजय अरोड़ा, पवन त्यागी, गजेंद्र त्यागी, नितिन शर्मा, रोहित भामा, दीपक गुप्ता, रुचि गुप्ता, चंचल त्यागी, अंजना वर्मा, प्रवेश जैन और प्रदीप चौधरी समेत कई निवेशक मौजूद रहे।
मामले की जांच सात सदस्यीय एसआइटी कर रही है। बैंक खातों के लेनदेन और खातों में ट्रांसफर हुई रकम के लाभार्थियों की पहचान का प्रयास किया जा रहा है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर सभी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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धवल जायसवाल, डीसीपी सिटी

