नोएडा जिला अस्पताल में आयुष्मान भुगतान पर सवाल, सर्जनों की शिकायत के बाद तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित

News Desk
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नोएडा: जिला अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का ऑपरेशन करने वाले सर्जनों के हक का पैसा आपातकालीन चिकित्सा अधिकारियों (ईएमओ) के खातों में ट्रांसफर करने का गंभीर मामला सामने आया है। बीते छह महीनों से चल रहे इस खेल में जहां दिन-रात महज 147 रुपये का भुगतान हुआ, वहीं ऑपरेशन से कोई संबंध न रखने वाले ईएमओ के खातों में करीब 2 लाख रुपये की राशि जमा करा दी गई।

ठगे गए डॉक्टरों को जब इस वित्तीय धांधली का पता चला, तो उन्होंने जिलाधिकारी मेधा रूपम और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. मदन मोहन त्रिपाठी से लिखित शिकायत की। मामला उजागर होते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।

तीन सदस्यीय जांच कमिटी गठित

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया है। समिति में डॉ. आर. के. सिंह, डॉ. एच.एन.एम. लवानिया और डॉ. चैतन्य देव को शामिल किया गया है। टीम को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

आयुष्मान कार्ड के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का भुगतान डॉक्टरों के बजाय ईएमओ के खातों में होने की शिकायत मिली है। जांच टीम की रिपोर्ट आते ही स्पष्ट होगा कि यह प्रशासनिक चूक थी या सोची-समझी साजिश। दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होगी और डॉक्टरों का बकाया पैसा लौटाया जाएगा।

डॉ. अशोक कुमार झा, सीएमएस

ऐसे खुला पूरा खेल

अस्पताल में तैनात डॉ. आलोक, डॉ. रेनू अग्रवाल और डॉ. अनुराग समेत अन्य सर्जनों ने जब आयुष्मान योजना के तहत प्रोत्साहन राशि का हिसाब मांगा, तब इस फर्जीवाड़े की पोल खुली। पीड़ित डॉक्टरों का कहना है कि जब ईएमओ का सर्जरी और ऑपरेशन से कोई लेना-देना ही नहीं है, तो महीनों तक लगातार किश्तों में यह रकम उनके निजी खातों में कैसे ट्रांसफर होती रही?

कई बार में भेजे गए पैसे

आरोप है कि ईएमओ डॉ. नेहा शर्मा और डॉ. आद्या सिंह के खातों में यह राशि कई बार में भेजी गई। वहीं मामला अधिकारियो तक पहुंचने के बाद आरोपी ईएमओ अपनी सफाई में लापरवाही का तर्क दे रहे हैं। डॉ. नेहा शर्मा ने कहा कि मेरे खाते में एक बार ही रुपये आए हैं। मेरा आयुष्मान योजना से कोई संबंध नहीं है। खाते में पैसे कैसे आए, इसकी जानकारी नहीं है। मैं राशि वापस करने को तैयार हूं। वहीं डॉ. आद्या सिंह ने कहा कि मुझे जानकारी नहीं है कि ये रुपये मेरे खाते में कैसे ट्रांसफर हुए।

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