
नई दिल्ली: बैंक अधिकारियों को कंपनी के निदेशक के नाम पर झांसा देकर खाते से लाखों रुपये ट्रांसफर कराने वाले गिरोह का दिल्ली पुलिस सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की साइबर पुलिस ने पर्दाफाश किया है. पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, वर्तमान और इससे जुड़े मामलों की जांच के दौरान करीब 2.50 करोड़ रुपये की संपत्ति बरामद की गई है. इसमें 101 सोने के सिक्के, सोने की चेन, कड़े, हार, अंगूठियां, बालियां, नकदी और कार शामिल है. पुलिस उपायुक्त राजवीर सिंह के नेतृत्व में सेंट्रल जिला पुलिस की टीम ने तकनीकी जांच और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर आरोपियों की पहचान की.
एफडी की बात कर जीता बैंक अधिकारियों का भरोसा
पुलिस उपायुक्त राजवीर सिंह के अनुसार, मामला बीते अगस्त महीने का है जहां एक सरकारी बैंक में व्यक्ति ने ब्रांच मैनेजर को फोन किया और खुद को कंपनी का निदेशक बताया. उसने शुरुआत में एक करोड़ रुपये की एफडी कराने की बात की और ब्याज दरों पर चर्चा कर बैंक अधिकारियों का भरोसा जीतने की कोशिश की. इसके बाद आरोपी ने चेकबुक खत्म होने का बहाना बनाकर ईमेल के जरिए भुगतान करने का अनुरोध किया. इसके बाद कंपनी के आधिकारिक ईमेल से मिलता-जुलता फर्जी ईमेल बनाकर भुगतान निर्देश भेजे गए. इसमें कंपनी के खाते से 22,56,922 रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर करने को कहा गया। पुलिस के मुताबिक, दबाव और जल्दबाजी का माहौल बनाकर आरोपियों ने बैंक अधिकारियों से RTGS के जरिए रकम ट्रांसफर करा ली.
लोनी से पकड़े गए दोनों आरोपी
जांच में पता चला कि ठगी की रकम पश्चिम बंगाल में संचालित एक म्यूल बैंक खाते में पहुंची थी. पुलिस टीम ने मोबाइल नंबर, ईमेल से जुड़े तकनीकी विवरण और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर विनय कुमार यादव (36) और अनिल कुमार सहगल (65) को गिरफ्तार किया. पुलिस के अनुसार, विनय कुमार यादव एक अन्य मामले में घोषित अपराधी था और सात साल से अधिक समय से फरार चल रहा था. दोनों आरोपियों के खिलाफ पहले भी वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है.
छह अन्य मामलों का भी खुलासा
पुलिस का दावा है कि आरोपियों की गिरफ्तारी से इसी तरह बैंक अधिकारियों को झांसा देकर रकम ट्रांसफर कराने के छह अन्य मामले भी जुड़े पाए गए हैं. इनमें गुरुग्राम, पलवल और दिल्ली के अलग-अलग जिलों के मामले शामिल हैं. बरामद संपत्ति का संबंधित मामलों से संबंध स्थापित करने के लिए जांच की जा रही है.
बैंकों और कंपनियों को सतर्क रहने की सलाह
पुलिस ने बैंकों और कंपनियों को सलाह दी है कि बड़े भुगतान के अनुरोध पर केवल ईमेल के आधार पर कार्रवाई न करें. कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता से बैंक रिकॉर्ड में दर्ज मोबाइल नंबर पर संपर्क कर पुष्टि करें. किसी भी कॉल या ईमेल में जल्दबाजी का दबाव बनाए जाने पर अनिवार्य दस्तावेजों और सत्यापन प्रक्रिया को नजरअंदाज न करें.
