
नई दिल्ली: दिल्ली में ‘इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ को नई उड़ान देने के लिए उपराज्यपाल ने सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों को मंजूरी दे दी है. उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने अब फैसलों को लागू करने के लिए सभी संबंधित विभागों को सख्त निर्देश दिए हैं. एलजी ने स्पष्ट किया है कि अभियान के तहत बचे हुए सभी प्राथमिक कार्यों को हर हाल में नवंबर महीने के अंत तक पूरा कर लिया जाए.
उपराज्यपाल सचिवालय में आयोजित इस समीक्षा बैठक में दिल्ली के मुख्य सचिव, एमसीडी आयुक्त, प्रधान सचिव (गृह), डीडीए के उपाध्यक्ष और शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव सहित राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. गौरतलब है कि इससे पूर्व 21 अगस्त को भी इस संबंध में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें सभी विभागों को समयसीमा का पालन करने के कड़े निर्देश दिए गए थे.
48 ग्रामीण गांवों के शहरीकरण की अधिसूचना जारी: बैठक के दौरान उपराज्यपाल को सूचित किया गया कि जनवरी 2025 में शुरू किए गए फेज़-I के अंतर्गत निर्धारित 23 प्राथमिक क्षेत्रों में से 22 का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है. फेज़-I के तहत सबसे महत्त्वपूर्ण उपलब्धि 48 ग्रामीण गांवों के शहरीकरण प्रक्रिया को पूरा करना रही, जिसका गजट नोटिफिकेशन भी जारी किया जा चुका है. ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योगों के लिए न्यूनतम सड़क चौड़ाई को तर्कसंगत बनाने से जुड़ा अंतिम बचा हुआ एक कार्य भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा.
दुकानों के स्थायी पंजीकरण और बिजली कनेक्शन में बड़ी राहत: इस वर्ष जनवरी में शुरू किए गए फेज़-II (जिसमें 23 प्राथमिक और 05 वैकल्पिक क्षेत्र शामिल हैं) की 28 अक्टूबर 2026 तक की प्रगति रिपोर्ट एलजी के समक्ष रखी गई. अगस्त में जहां केवल 7 लक्ष्य पूरे हुए थे, वहीं अब अधिकांश लक्ष्य हासिल कर लिए गए हैं. एमसीडी द्वारा दोहरे लाइसेंस की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है तथा दुकानों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए स्थायी पंजीकरण की सुविधा शुरू की गई है. 200 किलोवाट तक के बिजली कनेक्शन अब बिना किसी पूर्व निरीक्षण के स्वीकृत किए जा रहे हैं.
निजी स्कूलों व लीगल मेट्रोलॉजी के नियम आसान: लीगल मेट्रोलॉजी लाइसेंसिंग और निजी स्कूलों की बुनियादी ढांचा आवश्यकताओं पर अंतिम अधिसूचनाएं जारी कर पोर्टल पर अपलोड कर दी गई हैं. निजी स्कूलों के लिए न्यूनतम भूमि की बाध्यता हटा दी गई है और एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट को और सरल बनाया जा रहा है. राज्य के सभी अधिनियमों, नियमों और सरकारी आदेशों के लिए ‘दिल्ली-दस्तावेज़’ डिजिटल रिपॉजिटरी की शुरुआत की गई है.
दो महत्त्वपूर्ण विधेयकों को कैबिनेट की मंजूरी: दिल्ली इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस बिल 2026, इस विधेयक को दिल्ली कैबिनेट द्वारा मंजूरी दे दी गई है और इसे गृह मंत्रालय को डीडीए की टिप्पणियों के साथ भेज दिया गया है. निजी विश्वविद्यालयों में भूमि, बंदोबस्ती और बुनियादी ढांचे के नियमों को सुगम बनाने वाले इस विधेयक को 23 सितंबर को कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है, जिसे जल्द ही विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा.
अनापत्ति प्रमाण पत्रों से मुक्ति और अन्य प्रशासनिक सुधार: भवन निर्माण योजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया से चार प्रमुख NOC दिल्ली जल बोर्ड, CIF, वन विभाग और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति को अलग करने के लिए Unified Building Bye-Laws, 2016 में संशोधन का प्रस्ताव अंतिम चरण में है. दिल्ली फायर सर्विस एक्ट, 2007 और रूल्स, 2010 में संशोधन कर नेशनल बिल्डिंग कोड के अनावश्यक संदर्भों को हटा दिया गया है. डॉक्टरों के सरल पंजीकरण से जुड़े नियमों को विधि विभाग से हरी झंडी मिल चुकी है. इसके अलावा, बेड एंड ब्रेकफास्ट एस्टेब्लिशमेंट एक्ट, 2007 को रद्द करने का प्रस्ताव विधानसभा द्वारा पारित कर दिया गया है.
समीक्षा के अंत में उपराज्यपाल ने उद्योग विभाग को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जिन मुद्दों की समयसीमा कई बार लांघी जा चुकी है, उनकी अड़चनों को बैठक के भीतर ही सुलझाया जाए. उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली को अन्य राज्यों के समकक्ष लाने के लिए यह अभियान अत्यंत आवश्यक है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नवंबर अंत तक शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए.
