
नई दिल्ली: सुहागिनों के सबसे खास और पावन पर्व करवा चौथ पर इस बार इंद्रदेव कुछ ज्यादा ही मेहरबान नजर आए. एक तरफ जहां सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की लंबी उम्र के लिए पूरे दिन की निर्जला उपवास की कठिन तपस्या में जुटी थीं, वहीं दूसरी तरफ अचानक शुरू हुई बारिश और आसमान में छाए घने बादलों ने उनकी धड़कनें बढ़ा दीं. महिलाओं के मन में बस एक ही सवाल था कि अगर आज चांद बादलों के पीछे छिप गया, तो वे अर्घ्य कैसे देंगी और अपना व्रत कैसे खोलेंगी? वहीं दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता ने जन सेवा सदन में अपने परिवार के साथ करवा चौथ के मौके पर पूजा की.
उन्होंने अपने X हैंडल पर लिखा, करवा चौथ का यह पवित्र त्योहार पति-पत्नी के बीच अटूट प्रेम, आपसी विश्वास और पूर्ण समर्पण का अनूठा प्रतीक है. यह हमारी समृद्ध भारतीय संस्कृति की उस गहरी परंपरा को जीवंत करता है. सभी को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं. आपका जीवन प्रेम, सौभाग्य, सुख और समृद्धि से परिपूर्ण रहे.
करवा चौथ के इस खास मौके पर ईटीवी भारत ने जब शहर की महिलाओं से बातचीत की, तो उनके चेहरों पर व्रत की थकान के बजाय गजब का उत्साह देखने को मिला. पिछले 15 साल से लगातार करवा चौथ का व्रत रख रही प्रियंका ने कहा कि करवा चौथ का नाम सुनते ही तैयार होने का चाव, अपनी मनपसंद साड़ी का सिलेक्शन और मेहंदी लगवाने की जो भागदौड़ होती है, उसका मजा ही अलग है. हर महिला चाहती है कि उसकी मेहंदी सबसे गहरी रचे. आज बारिश का मौसम है, इसलिए आसमान में चांद निकलने की गुंजाइश और उम्मीद दोनों ही कम हैं. पर क्या करें, इसी उम्मीद पर तो हमारी दुनिया कायम है. हालांकि, मंदिर के पंडित और पुरानी ने हमें पहले ही कई दूसरे उपाय बता दिए हैं.
जूस पिलाकर खुलवाया व्रत
उन्होंने कहा, सबसे बड़ी फिक्र और जंग तो उन नई नवेली दुल्हनों के लिए है जिनका यह पहला करवा चौथ है. पहले करवा चौथ पर चांद का दीदार न होना थोड़ा सा डिसपॉइंटिंग जरूर है, पर कोई बात नहीं इस बार मेरे पति ने भी व्रत रखने का पूरा प्रयास किया, पर आधे दिन में ही मुझे उन्हें जूस पिलाकर व्रत खुलवाना पड़ा क्योंकि उन्हें भूखे रहने की आदत जो नहीं है.
दादी-मम्मा के बताए नुस्खे आए काम
वहीं एक अन्य व्रती नैंसी ने बताया कि बारिश और बादलों के कारण इस बार का करवा चौथ थोड़ा चैलेंजिंग जरूर लग रहा है. यह सवाल सबके मन में है कि आखिर आज चंद्रमा कहां छुपे होंगे. लेकिन हमारी दादी और मम्मा ने हमें पहले ही बहुत बढ़िया विकल्प सिखा रखा है. अगर आसमान में चांद बादलों की ओट में छिप जाता है, तो हम भगवान शंकर जी की जटाओं में सुशोभित चंद्रमा का ध्यान करके या उसी रूप में अर्घ्य देकर अपना व्रत खोल लेंगे. परंपराओं में हर समस्या का समाधान होता है, इसलिए हम भी इसी रास्ते से अपना व्रत पूरा करेंगे.
आज तो चांद निकलेगा नहीं पर रील्स जरूर डलेंगी
पिछले 20 वर्षों से करवा चौथ का व्रत रख रहीं किरण अरोड़ा ने इस अनोखे मेल पर चुटकी लेते हुए कहा कि आज का दिन बेहद खास है. हर साल इस व्रत को लेकर एक अलग ही एक्साइटमेंट और नई तैयारी होती है. एक तरफ करवा चौथ का उपवास और दूसरी तरफ यह बारिश. भले ही आसमान में चांद बादलों के पीछे छिप जाए, लेकिन हमारे पास देसी और पारंपरिक सारे तरीके मौजूद हैं. हम थाल के अंदर ही चांद का चित्र बनाकर, उस पर रोली से ‘ओम’ और ‘स्वास्तिक’ बनाकर उसकी पूजा करेंगे और अपना व्रत खोलेंगे. हालांकि, थोड़ी बहुत देर चांद का इंतजार तो बनता ही है. और हां, बारिश हो या चांद न दिखे, हमारी रील्स जरूर सोशल मीडिया पर डलेंगी.
45 सालों का अनुभव
इस पूरी बातचीत में सबसे खास अनुभव रहा मधुबाला का, जो पिछले पूरे 45 वर्षों से लगातार यह पावन व्रत रख रही हैं. अपने लंबे सफर के बारे में बताते हुए मधुबाला नेकहा कि इतने सालों से व्रत रख रही हूं, लेकिन आज भी हर साल यह त्योहार उतना ही नया और रोमांचक लगता है, जितना पहले साल लगा था. इस पर्व को मनाने की खुशी उम्र के साथ कम नहीं होती, बल्कि और बढ़ती जाती है. मौसम ने करवट ली है और बारिश आ गई है, जिससे थोड़ा बहुत बदलाव तो हुआ ही है. जैसी हमारे भगवान की मर्जी होगी, वैसी पूजा करेंगे. हम श्रद्धा भाव से अपना व्रत पूरा करेंगे.
