नई दिल्ली: राजधानी के द्वारका जिला पुलिस की साइबर थाना टीम ने मध्य प्रदेश के इंदौर में चल रहे एक बड़े अंतरराज्यीय फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने मौके से 6 साइबर ठगों को भी गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई उत्तम नगर निवासी एक व्यक्ति से शेयर व फॉरेक्स मार्केट में ट्रेडिंग के नाम पर 17.3 लाख रुपये की ठगी की शिकायत की जांच के दौरान की गई है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपायुक्त कुशल पाल सिंह के निर्देश पर साइबर पुलिस की एक विशेष टीम गठित कर इंदौर में छापेमारी की गई.
दिल्ली पुलिस मुख्यालय में बुधवार को पुलिस उपायुक्त कुशल पाल सिंह ने बताया कि गिरफ्तार सभी आरोपी इंदौर के ही निवासी हैं. पकड़े गए आरोपियों में सुमित सिंह चौधरी (23), राहुल सिंह (32), अश्विनी कुमार (35), महेश सिंह (32), पीयूष राठौर (27) और रविंदर सिंह चौहान (24) शामिल हैं. इनमें से अश्विनी कुमार व महेश सिंह टीम लीडर के रूप में कार्य कर रहे थे, जबकि अन्य आरोपी कॉलर के रूप में काम करते थे.
आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि ये सभी पिछले 2-4 महीनों से इस अवैध कॉल सेंटर में 10,000 से 14,500 रुपये प्रति माह के वेतन पर काम कर रहे थे. इसके अतिरिक्त इन्हें पीड़ितों से ठगी गई रकम का लगभग 10 प्रतिशत कमीशन नकद में दिया जाता था.
ये था गिरोह के ठगी का तरीका
आरोपी एक नामी निवेश कंपनी के नाम पर अवैध कॉल सेंटर चला रहे थे. ये अवैध स्रोतों से उन लोगों का डेटा खरीदते थे जो पहले से शेयर बाजार में निवेश कर रहे थे. शुरुआत में पीड़ितों का विश्वास जीतने के लिए आरोपी उन्हें भारतीय शेयर बाजार में सही मार्गदर्शन देकर व्यापार कराते थे. विश्वास जमने पर उन्हें एक फर्जी अंतरराष्ट्रीय फॉरेक्स प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग का लालच दिया जाता था. पीड़ितों से निजी बचत या करंट बैंक खातों में पैसे जमा कराए जाते थे. फर्जी प्लेटफॉर्म पर डमी (बनावटी) मुनाफा दिखाया जाता था, जिससे वे और अधिक निवेश करें. जब पीड़ित अपने पैसे या मुनाफे को निकालने की कोशिश करते थे, तो आरोपी बहाने बनाते थे और बाद में व्यापार में पूरा नुकसान दिखाकर उनकी पूरी जमा पूंजी हड़प लेते थे.
बरामदगी और राष्ट्रीय स्तर का कनेक्शन
पुलिस टीम ने फर्जी कॉल सेंटर से 28 सीपीयू, 25 मोबाइल फोन, 2 वाई-फाई राउटर, 1 डीवीआर और 1 ऑडियो-कम-वीडियो रिकॉर्डिंग कैमरा जब्त किया है. बरामद सीपीयू के डेटा विश्लेषण से 1,400 से अधिक एक्सेल शीट मिली हैं, जिनमें देश भर के हजारों निवेशकों के नाम, पैन नंबर, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और बैंक विवरण शामिल हैं.
डीसीपी कुशल पाल सिंह ने बताया कि अब तक की जांच में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल की शिकायतों के जरिए महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक, बिहार व देश के अन्य राज्यों के पीड़ितों से जुड़ी 54.70 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी का खुलासा हो चुका है. पुलिस ने मामले के मास्टरमाइंड और गिरोह के अन्य सहयोगियों की पहचान कर ली है. उन्हें जल्द गिरफ्तार करने के लिए आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है.

