
नई दिल्ली: विदेश में नौकरी व वीजा दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले कथित रैकेट का उत्तर-पश्चिम जिला पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. थाना सुभाष प्लेस पुलिस ने मामले में मास्टरमाइंड अबीर पोइलान (45) व उसके सहयोगी मुस्तकीम (38) को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार आरोपी नेताजी सुभाष प्लेस स्थित अग्रवाल साइबर प्लाजा-1 में डायनेमिक ओवरसीज नाम से कार्यालय चलाकर इजराइल व इराक में नौकरी एवं वीजा दिलाने का झांसा देते थे. पुलिस का दावा है कि अब तक करीब 46 शिकायतकर्ता सामने आए हैं.
उत्तर-पश्चिम जिला की डीसीपी आकांक्षा यादव ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि आरोपियों के कब्जे और उनकी निशानदेही पर 31 ग्राम वजन के सोने के सिक्के, 22 पासपोर्ट, 11 मोबाइल फोन, 10 एटीएम कार्ड, तीन कंप्यूटर, एक कलर प्रिंटर, भुगतान संबंधी दस्तावेज व डायनेमिक ओवरसीज की मोहरें बरामद की गई हैं. बरामद 22 पासपोर्ट में तीन पासपोर्ट मुस्तकीम के कब्जे से मिले, जिनमें दो नेपाली नागरिकों के हैं.
इजराइल के नाम पर 1.70 लाख व इराक के लिए 70 हजार रुपये
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी विदेश में रोजगार दिलाने के नाम पर लोगों से अलग-अलग रकम लेते थे. डीसीपी आकांक्षा यादव के अनुसार इजराइल का वीजा दिलाने के लिए प्रति व्यक्ति 1.70 लाख रुपये व इराक का वीजा दिलाने के लिए प्रति व्यक्ति 70 हजार रुपये लिए जाते थे. आरोपियों ने दिल्ली के नेताजी सुभाष प्लेस स्थित अग्रवाल साइबर प्लाजा-1 में कार्यालय बना रखा था. यहां आने वाले लोगों को विदेश में रोजगार व वीजा दिलाने का भरोसा दिया जाता था. डीसीपी आकांक्षा यादव के मुताबिक जनसुनवाई में शिकायतकर्ताओं से मिली रकम की रसीदें और भुगतान संबंधी दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं. इन दस्तावेजों व वित्तीय लेन-देन की जांच के जरिए ठगी की पूरी रकम की श्रृंखला का पता लगाया जा रहा है.
थाना दिवस की जन सुनवाई में पहुंची शिकायत
डीसीपी आकांक्षा यादव के मूताबिक यह मामला ‘थाना दिवस–जन सुनवाई’ के दौरान सामने आया था. दिल्ली के उपराज्यपाल के निर्देशों के तहत 1 अगस्त को थाना सुभाष प्लेस में जन सुनवाई आयोजित की गई थी. इसी दौरान विजय सिंह, संयुक्त पुलिस आयुक्त/एनआर के समक्ष कथित वीजा धोखाधड़ी से संबंधित शिकायत पहुंची. शिकायत की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने शिकायतकर्ताओं को कार्रवाई का भरोसा दिया. इसके बाद थाना सुभाष प्लेस पुलिस ने शिकायत की जांच शुरू की गई. तकनीकी व वित्तीय साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद पुलिस ने कथित तौर पर रैकेट से जुड़े अबीर पोइलान व मुस्तकीम की पहचान की और दोनों को गिरफ्तार कर लिया.
ठगी की रकम से सोने के सिक्के खरीदने का आरोप
डीसीपी आकांक्षा यादव के मुताबिक पूछताछ और पुलिस रिमांड के दौरान अबीर पोइलान के कब्जे से 31 ग्राम वजन के कई सोने के सिक्के बरामद किए गए. इन सिक्कों को शिकायतकर्ताओं से ठगी गई रकम से खरीदा गया था. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि ठगी की रकम से कथित रूप से खरीदे गए सोने के संबंध में एनबीएफसी से लिए गए गोल्ड लोन के वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच व सत्यापन किया जा रहा है. इसके अतिरिक्त आरोपियों द्वारा गिरवी रखी गई सोने की वस्तुओं का भी पता चला है. मुस्तकीम द्वारा गिरवी रखी गई दो सोने की चेन तथा अबीर द्वारा गिरवी रखी गई दो सोने की अंगूठियां, एक सोने की चेन व एक जोड़ी कान की बालियों से संबंधित जानकारी जांच में सामने आई है.
22 पासपोर्ट व 10 एटीएम कार्ड बरामद
पुलिस के मुताबिक, अबीर के कब्जे से 19 भारतीय पासपोर्ट, पांच मोबाइल फोन, तीन कंप्यूटर, एक कलर प्रिंटर, भुगतान रसीदें और डायनेमिक ओवरसीज की मोहरें बरामद हुईं. वहीं, दूसरे आरोपी मुस्तकीम के कब्जे से छह मोबाइल फोन, 10 एटीएम कार्ड और तीन पासपोर्ट बरामद किए गए. इन तीन पासपोर्ट में दो नेपाली नागरिकों के बताए गए हैं. पुलिस इन मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, पासपोर्ट और वित्तीय दस्तावेजों की जांच कर रही है. इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि आरोपियों के साथ इस कथित धोखाधड़ी में और कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे तथा ठगी से अर्जित रकम या संपत्ति कहां-कहां है.
एक आरोपी पहले भी दर्ज मामले में नामजद
अबीर पोइलान पहले भी एक मामले में आरोपी रहा है. उसके खिलाफ एफआईआर नंबर 15/20, धारा 420 आईपीसी, थाना गोविंदपुरी में मामला दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है. वहीं, मुस्तकीम की कोई पूर्व आपराधिक संलिप्तता पुलिस रिकॉर्ड में नहीं मिली है. इस मामले में थाना सुभाष प्लेस में एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, भुगतान रसीदों व अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच कर रही है, जिससे शिकायतकर्ताओं से ली गई रकम के पूरे लेन-देन का पता लगाया जा सके.
आगे भी जारी रहेगी जांच, होगी कार्रवाई
डीसीपी आकांक्षा यादव के मुताबिक मामले में बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच जारी है. पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रैकेट में कितने लोग शामिल थे, कितने लोगों से रकम ली गई है. ठगी की रकम को कहां-कहां इस्तेमाल किया गया है. इसके साथ ही अन्य संभावित पीड़ितों और सहयोगियों की भी पहचान की जा रही है.डीसीपी आकांक्षा यादव ने कहा कि जन सुनवाई के माध्यम से नागरिकों की शिकायतों को सीधे सुनकर उन पर समयबद्ध कार्रवाई करने का प्रयास किया जा रहा है.
आकांक्षा यादव के मुताबिक इस मामले में भी शिकायत प्राप्त होने के बाद पुलिस ने तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की और आरोपियों को गिरफ्तार किया. पुलिस अब रैकेट से जुड़े अन्य संभावित आरोपियों की पहचान, शेष पासपोर्ट और केस प्रॉपर्टी की बरामदगी तथा शिकायतकर्ताओं से ली गई रकम की पूरी लेन-देन श्रृंखला का पता लगाने में जुटी है. मामले में आगे की जांच जारी है.
ठगी से बचने के लिए बरतें सावधानियां
- एजेंसी की वैधता जांचें: विदेश में नौकरी दिलाने वाली एजेंसी का पंजीकरण व लाइसेंस संबंधित सरकारी रिकॉर्ड से जरूर जांचें.
- बिना जांच के एडवांस न दें: केवल फोन, व्हाट्सऐप या सोशल मीडिया पर मिले विज्ञापन के आधार पर किसी व्यक्ति या एजेंसी को पैसे न दें.
- ऑफर लेटर की पुष्टि करें: जिस विदेशी कंपनी में नौकरी का दावा किया जा रहा है, उसकी वेबसाइट व आधिकारिक संपर्क माध्यम से सीधे नौकरी के ऑफर की पुष्टि करें.
- वीजा खुद सत्यापित करें: वीजा जारी होने का दावा होने पर संबंधित देश के दूतावास/कांसुलेट या आधिकारिक पोर्टल से उसकी वास्तविकता जांचें.
- रसीद जरूर लें: कोई भी भुगतान करते समय आधिकारिक रसीद लें और संभव हो तो बैंकिंग माध्यम से ही भुगतान करें.
- पासपोर्ट जमा करने से बचें: बिना उचित कारण किसी एजेंट के पास अपना मूल पासपोर्ट लंबे समय तक न छोड़ें.
- असामान्य रकम या जल्दबाजी से सावधान रहें: सीमित समय में वीजा लगवाने, नौकरी पक्की कराने या तुरंत पैसे जमा करने का दबाव बनाया जाए तो सतर्क हो जाएं.
- दस्तावेजों की जांच करें: अनुबंध, नौकरी की शर्तें, वेतन, कंपनी का पता व वीजा श्रेणी को अच्छी तरह पढ़े बिना हस्ताक्षर न करें.
- ठगी होने पर तुरंत शिकायत करें: पैसे चले जाने या फर्जीवाड़े का संदेह होने पर तुरंत पुलिस व संबंधित साइबर अपराध प्राधिकरण को शिकायत दें.
