गाजियाबाद। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग की ओर से एक से 15 अप्रैल तक चलाया गया विशेष स्कूल वाहन सत्यापन अभियान खत्म हुए 75 दिन बीत चुके हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों के पालन की तस्वीर अब भी अधूरी है।
विभाग ने सभी स्कूलों को यूपी-आइएसवीएमपी पोर्टल पर स्कूल वाहनों का विवरण अपडेट करने के साथ शपथ पत्र अपलोड करना अनिवार्य किया था, लेकिन बड़ी संख्या में स्कूलों ने अब तक इस प्रक्रिया को पूरा नहीं किया है। सवाल यह भी है कि जब विभाग के पास स्कूलों और वाहनों का पूरा रिकार्ड उपलब्ध है तो समय सीमा बीतने के बाद भी प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी।
अधिकांश स्कूल अब तक विभागीय निर्देशों का पालन नहीं कर सके
गाजियाबाद जिले के 2,713 आनबोर्ड स्कूलों में से 2,630 ने शपथ पत्र अपलोड कर दिया है, जबकि 83 स्कूल अब भी डिफाल्टर हैं। पड़ोसी जिलों में स्थिति और भी चिंताजनक है। गौतमबुद्धनगर के 1,997 स्कूलों में केवल 1461, बुलंदशहर के 4,096 में 2971 और हापुड़ के 1,441 स्कूलों में महज 1076 ने ही शपथ पत्र जमा किया है। यानी इन जिलों में अधिकांश स्कूल अब तक विभागीय निर्देशों का पालन नहीं कर सके हैं।
यह शपथ पत्र केवल औपचारिकता नहीं है। इसके माध्यम से स्कूल प्रबंधन लिखित रूप से यह घोषणा करता है कि बच्चों के परिवहन में लगाए जा रहे सभी वाहन पोर्टल पर दर्ज हैं और उनके अलावा कोई अन्य वाहन संचालित नहीं किया जा रहा है।
मानकों के विपरीत वाहन अब भी बच्चों को ढो रहे
ऐसे में बड़ी संख्या में शपथ पत्र लंबित रहने से इस बात की आशंका भी गहराने लगी है कि कहीं पोर्टल पर दर्ज वाहनों से अधिक वाहन तो सड़कों पर नहीं दौड़ रहे या फिर मानकों के विपरीत वाहन अब भी बच्चों को ढो रहे हैं। परिवहन विभाग ने शपथ पत्र जमा न करने वाले स्कूलों को नोटिस जारी किए हैं, लेकिन अब तक कार्रवाई इसी स्तर पर अटकी हुई है।
जिन स्कूलों ने अभी तक शपथ पत्र जमा नहीं किए हैं, उन्हें नोटिस जारी किया गया है। अगले सप्ताह विशेष अभियान चलाकर नियमों के विपरीत संचालित स्कूल वाहनों की जांच की जाएगी। यदि कोई भी वाहन मानकों के विपरीत मिला तो उसे सीज किया जाएगा और संबंधित स्कूल के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। – अशोक कुमार श्रीवास्तव, एआरटीओ प्रशासन, गाजियाबाद
