नोएडा में यमुना की मिट्टी से तैयार हो रहे गणपति, लालबाग के राजा से बाल गणेश तक कई रूप

News Desk
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नोएडा: इस बार गणेश उत्सव के लिए मथुरा की यमुना नदी की मिट्टी से गणपति बप्पा की मूर्तियां तैयार की जा रही हैं। कोलकाता से आए मूर्तिकार पिछले ढाई महीनों से विविध स्वरूपों वाली गणेश प्रतिमाएं गढ़ने में जुटे हुए थे और अब इन मूर्तियों को अंतिम रूप दे दिया गया है।

स्थानीय नोएडा की मिट्टी में अशुद्धियां और गंदगी अधिक होने के कारण उसे मूर्ति निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता, इसलिए विशेष रूप से यमुना की पावन मिट्टी का इस्तेमाल किया गया है। मूर्तिकारों के अनुसार, इस बार 150 से अधिक पर्यावरण-अनुकूल (ईको-फ्रेंडली) गणपति मूर्तियां बनाई गई हैं, जिनके आकार 1 फीट से लेकर 5 और 10 फीट तक हैं।

इनमें से लगभग 45 मूर्तियां विशेष रूप से बड़ी और आकर्षक डिजाइन वाली हैं। मूर्तिकार कार्तिक ने बताया कि एक मूर्ति को पूरा तैयार करने में लगभग पांच दिन लगते हैं। इसके बाद उस पर रंगाई, सजावट, वेशभूषा और श्रृंगार का कार्य किया जाता है। तैयार मूर्तियों की कीमत 700 रुपये से शुरू होकर 10,000 रुपये तक है।

इस बार गणेशजी की मूर्तियों को विविध स्वरूपों और मुद्राओं में ढाला गया है। इनमें लालबाग के राजा, भगवान शिव की गोद में विराजमान बाल गणेश, छत्रपति शिवाजी महाराज के गणेश रूप और शिवजी के अघोरी स्वरूप में गणेश की प्रतिमाएं प्रमुख हैं।

मूर्तिकार कार्तिक के अनुसार, सर्वप्रथम लकड़ी और घास-फूस से मूर्ति का ढांचा (फ्रेम) तैयार किया जाता है, जिसके बाद उस पर मिट्टी की परत चढ़ाई जाती है। इस प्रक्रिया में मथुरा की यमुना नदी की मिट्टी के साथ चिकनी मिट्टी, जौ, भूसा और पूजन सामग्री सहित अन्य प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग किया जाता है।

कई चरणों में आकार देने के बाद मूर्ति को सुखाया जाता है, फिर उस पर रंगाई की जाती है। अंत में भगवान गणेश की वेशभूषा, आभूषण और श्रृंगार करके प्रतिमा को अंतिम रूप दिया जाता है। मूर्तिकारों के मुताबिक, हर साल पर्यावरण-अनुकूल (ईको-फ्रेंडली) गणेश प्रतिमाओं की मांग बढ़ रही है।

नोएडा और गाजियाबाद के अलावा आसपास के जिलों से भी मूर्तियों की बुकिंग हुई है और गणेश चतुर्थी से पहले इनकी डिलीवरी शुरू कर दी जाएगी। इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी। 13 सितंबर से श्रद्धालु गणपति की मूर्तियां खरीदकर उन्हें घरों, मंदिरों, कॉलोनियों और पंडालों में स्थापित करेंगे। इसी के मद्देनजर पंडालों और घरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं।

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