जेवर। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फोर कोर्ट से पार्किंग एरिया को जोड़ने वाले अंडरपास में मंगलवार को हुई तेज वर्षा के बाद जलभराव का मुख्य कारण मिट्टी थी, जो पानी के साथ बहकर अंडरपास में पहुंची। ड्रेनेज में लगी बारीक जाली में मिट्टी के जमने से जल निकासी अवरुद्ध हो गई और अंडरपास में पानी भर गया। इस समस्या का समाधान तलाशने के लिए एयरपोर्ट प्रबंधन ने प्रयास शुरू कर दिए हैं।
एयरपोर्ट प्रबंधन अंडरपास और आसपास बने लैंडस्केपिंग क्षेत्र की समीक्षा कर इसमें बदलाव की योजना बना रहा है, ताकि वर्षा के दौरान लैंडस्केपिंग की मिट्टी को पानी के साथ बहकर ड्रेनेज सिस्टम तक पहुंचने से रोका जा सके। प्रबंधन का मानना है कि तेज वर्षा के दौरान लैंडस्केपिंग क्षेत्र की मिट्टी पानी के साथ बहकर अंडरपास के ड्रेनेज सिस्टम में पहुंचने से पानी की निकासी प्रभावित हुई थी।
दो माह पूर्व एयरपोर्ट से कमर्शियल फ्लाइट के संचालन शुरू होने के बाद लैंडस्केपिंग हुई थी। इस वजह से मिट्टी पानी के साथ बहकर ड्रेनेज तक पहुंची। तेज हवा के साथ बौछार को राेकने के लिए अंडरपास के बाहर बने स्लोप के ऊपर लगे जालीदार कपड़े की छत की भी समीक्षा की जा रही है।
यह छत 180 डिग्री की वर्षा की बौछार को रोकने में असफल रही थी और पानी अंडरपास में पहुंच गया था। इसे देखते हुए बौछार के साथ होने वाली वर्षा के दौरान पानी को अंडरपास में जाने से रोकने के उपाय किए जाएंगे। हालांकि एयरपोर्ट की खूबसूरती को कायम रखते हुए इसमें बदलाव चुनौती बन रहा है।
बढ़ाई जाएगी ड्रेनेज की क्षमता
भविष्य में कम समय में अधिक मात्रा में वर्षा होने पर भी अंडरपास में पानी जमा न हो, इसके लिए ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता बढ़ाने की तैयारी है। पानी की निकासी की व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाएगा। इसके साथ ही आसपास के स्लोप, लैंडस्केपिंग और पानी के बहाव की दिशा का भी परीक्षण किया जा रहा है।
बौछार के साथ वर्षा के पानी को रोकने पर जोर
मंगलवार को बौछार के साथ हुई तेज वर्षा के दौरान पानी अंडरपास तक पहुंच गया था। इसे देखते हुए अंडरपास के बाहर बने स्लोप के ऊपर लगी जालीदार कपड़े की छत की भी समीक्षा की जा रही है। यह देखा जा रहा है कि तिरछी वर्षा के दौरान पानी किस तरह अंडरपास की ओर पहुंचा और उसे रोकने के लिए किस तरह के बदलाव किए जा सकते हैं।

