
नोएडा: सेक्टर-94 में स्थित सुपरटेक सुपरनोवा सोसाइटी दिल्ली-NCR की सबसे ऊंची इमारतों में गिनी जाती है। यह लग्जरी सोसाइटी इनदिनों गंभीर जल संकट से जूझ रही है। इस आलीशान कॉम्प्लेक्स में रहने वाले निवासियों को पीने के पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है, जबकि उन्होंने यहां करोड़ों रुपये लगाकर अपने सपनों का घर खरीदा था। सोसाइटी प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के बीच इस मुद्दे को लेकर तनातनी की स्थिति बनी हुई है। इससे निवासियों में भारी आक्रोश और निराशा देखी जा रही है।
सोसाइटी के ‘नोवा ईस्ट’ और ‘नोवा वेस्ट’ टावरों में रह रहे लगभग 350 से ज्यादा परिवारों को नलों से अत्यंत दूषित, दुर्गंधयुक्त और पीले-काले रंग का पानी मिल रहा है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि पानी के साथ छोटे-छोटे कीड़े भी रेंगते हुए बाहर आ रहे हैं।
महंगा बोतलबंद पानी खरीदने की मजबूरी
दिल्ली से नोएडा शिफ्ट हुईं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गीता मिश्रा ने बताया कि शुरुआत में उनके किचन के सिंक से बदबूदार और काले रंग का पानी निकला, जिसमें कीड़े रेंग रहे थे। देखते ही देखते यह समस्या बाथरूम के नलों और टॉयलेट फ्लश तक फैल गई। दूषित पानी के इस्तेमाल से बच्चों में त्वचा संक्रमण जैसी बीमारियां बढ़ने लगी हैं। हम लोग नहाने, खाना पकाने और अन्य रोजमर्रा के कामों के लिए बाहर से महंगे दामों पर बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं।
बिल्डर की लापरवाही
इस संकट की जड़ में बिल्डर की लापरवाही और वित्तीय विवाद छिपा है। करीब दो साल पहले नोएडा अथॉरिटी ने सोसाइटी की गंगाजल आपूर्ति बंद कर दी थी। बिल्डर ने पानी का लगभग 42 लाख रुपये का बकाया बिल नहीं चुकाया था। ब्याज और जुर्माने के साथ यह राशि अब बढ़कर 72 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है। प्राधिकरण ने साफ कर दिया है कि बकाया जमा होने तक सप्लाई बहाल नहीं होगी। गंगाजल बंद होने के बाद पूरी सोसाइटी अब भूजल (बोरवेल) पर निर्भर है। इस खारे पानी को साफ करने वाला सोसाइटी का वॉटर सॉफ्टनर प्लांट काफी समय से खराब पड़ा है और उसकी क्षमता भी बहुत सीमित है। इसी कारण घरों तक बिना फिल्टर किया हुआ, सड़ा और कीड़ों वाला पानी पहुंच रहा है।
दिवालिया प्रकिया से गुजर रहा सुपरनोवा प्रोजेक्ट
सुपरटेक का सुपरनोवा प्रोजेक्ट वर्तमान में दिवालिया प्रक्रिया (Insolvency Proceedings) से गुजर रहा है। बैंक ऑफ महाराष्ट्र के 168 करोड़ रुपये के डिफॉल्ट के बाद नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक एम्पॉवर्ड कमेटी इस अटके हुए प्रोजेक्ट की निगरानी कर रही है।
गंगाजल की आपूर्ति फिर से शुरू करवाने का चल रहा प्रयास
नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों के अनुसार, प्रोजेक्ट अभी पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है, इसीलिए इसके पास आधिकारिक कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) भी मौजूद नहीं है। मार्च 2025 में NCLAT के आदेश के बाद सोसाइटी के रख-रखाव की जिम्मेदारी संभालने वाली अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) के सलाहकार नरेश नंदवानी ने कहा कि वे इस संकट को लेकर बेहद गंभीर हैं। AOA वर्तमान में कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के सहयोग से वॉटर प्रोसेसिंग यूनिट को ठीक करने और नोएडा प्राधिकरण से बातचीत कर गंगाजल की आपूर्ति फिर से शुरू करवाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। लेकिन जब तक यह कानूनी और वित्तीय विवाद सुलझ नहीं जाता, तब तक इन करोड़ों रुपये के सुपर-लक्जरी फ्लैटों में रहने वाले निवासियों को पानी की हर बूंद के लिए तरसना पड़ रहा है।
