
दिल्ली- दिल्ली के बक्करवाला-मुंडका क्षेत्र में यूईआर-2 पर प्रस्तावित टोल टैक्स को लेकर ग्रामीणों और केंद्र सरकार के बीच विवाद दिन-ब-दिन तीव्र होता जा रहा है। टोल छूट की मांग को लेकर आंदोलनरत ग्रामीणों के दो गुटों ने बुधवार को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा से अलग-अलग मुलाकात की, लेकिन दोनों ही वार्ताएं बेनतीजा रहीं।
सरकार की टोल पर दो टूक, ग्रामीणों का ऐलान: नहीं देंगे टोल
राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने स्पष्ट कर दिया कि दिल्ली के ग्रामीणों को टोल से कोई छूट नहीं दी जा सकती, क्योंकि देशभर में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं, ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि वे टोल टैक्स किसी भी कीमत पर नहीं देंगे और अब आंदोलन और व्यापक स्तर पर किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन किसानों की ज़मीनें इस हाईवे परियोजना में ली गई हैं, उन्हें टोल से मुक्त किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि दिल्ली के सभी ग्रामीण क्षेत्रों के लिए टोल छूट लागू हो। इसके साथ ही उन्होंने सर्विस रोड निर्माण और यूटर्न की सुविधाओं की भी मांग रखी, जिन पर मंत्री ने विचार का आश्वासन दिया, लेकिन टोल माफी पर सहमति नहीं दी।
राजनीतिक हलचल तेज, कांग्रेस ने भाजपा को घेरा
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भाजपा को आड़े हाथों लिया है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. नरेश कुमार ने सरकार पर “जनविरोधी रवैया” अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा केवल चुनाव के समय जनता को याद करती है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कापसहेड़ा और गुरुग्राम बॉर्डर से टोल हटवाया गया था, और यूईआर-2 पर भी यही नीति लागू होनी चाहिए।
डॉ. कुमार ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की हालिया दौरे पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें ज़मीनी समस्याओं की कोई समझ नहीं है। उन्होंने मुंडका रोड की खराब स्थिति को इसका उदाहरण बताया और चेतावनी दी कि कांग्रेस आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सड़कों पर उतरेगी।
सांसदों और विधायकों से भी की गई मुलाकात
ग्रामीणों के दोनों गुटों ने भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत, योगेंद्र चांदोलिया, और कई विधायकों से मिलकर अपनी मांगें केंद्रीय मंत्री तक पहुंचाईं। चौ. सुरेंद्र सोलंकी और चौ. रामकुमार सोलंकी के नेतृत्व में ग्रामीण प्रतिनिधिमंडलों ने ज़ोर दिया कि किसानों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।
वहीं, भाजपा सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से भेंट कर यूईआर-2 परियोजना से प्रभावित गांवों के निजी वाहनों को टोल फ्री करने का अनुरोध किया। उन्होंने याद दिलाया कि 2002 में किसानों की ज़मीन बेहद कम मुआवज़े पर अधिग्रहित की गई थी।
अब आर-पार की लड़ाई की तैयारी
वार्ताएं विफल होने और सरकार के सख्त रुख के बाद ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे टोल टैक्स के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। आने वाले दिनों में आंदोलन की रणनीति की घोषणा की जाएगी और जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक विरोध जारी रहेगा।
