गाजियाबाद। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बेशक दावा कर रहे हैं कि एंबुलेंस सेवा का रिस्पांस टाइम कम हो रहा है लेकिन हकीकत में कम होने की जगह यह टाइम बढ़ रहा है। पड़ताल करने पर पता चला है कि कहीं सड़क हादसों में घायल लोगों को अस्पताल ले जाने को कॉल करने के 20 मिनट तो कहीं आधा घंटे में एंबुलेंस पहुंच रहीं है।
राष्ट्रीय राजमार्गों से सटे 20 से अधिक प्राइवेट अस्पतालों में निश्शुल्क इलाज की सुविधा शुरू किये जाने के बाद भी अधिकांश एंबुलेंस चालक घायलों को दूर स्थित सरकारी अस्पतालों में ले जाकर भर्ती कर रहे हैं। इससे घायल लोगों को गोल्डन आवर में पर्याप्त इलाज मिलने में देरी हो रही है। नियम के मुताबिक कॉल करने के बाद सात मिनट 35 सेकेंड में एंबुलेंस को मौके पर पहुंच जाना चाहिए।
केस स्टडी-1
केस स्टडी-2
ईएमटी गिरीश के अनुसार मौके पर एंबुलेंस 8:45 बजे पहुंच गई। 9:16 बजे संजू देवी को जिला एमएमजी अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। ईएमओ ने जांच के बाद हायर सेंटर रेफर कर दिया। यही एंबुलेंस संजू देवी को जीटीबी में देर रात को भर्ती कराकर लौटी। हालत नाजुक है।
केस स्टडी-3
इन हॉट स्पॉट पर खड़ी रहती हैं एंबुलेंस
108 एंबुलेंस सेवा का रेस्पांस टाइम 7:35 मिनट तय है। सड़क हादसों को ध्यान में रखकर 18 हॉट स्पॉट पर एंबुलेंस खड़ी रहती हैं। बड़ी दुर्घटनाओं में अतिरिक्त एंबुलेंस भी भेजी जाती हैं। कुछ मामलों में एंबुलेंस के देर से पहुंचने की शिकायतें मिल रहीं है। इसकी निगरानी कराते हुए रेस्पांस टाइम को कम कराया जायेगा। निजी अस्पतालों में भी हादसों में घायलों को भर्ती के लिये भेजने की कवायद तेज की जायेगी।
– डॉ. जीके मिश्रा, जिला मलेरिया अधिकारी(प्रभारी एंबुलेंस सेवा)

