पूरी कीमत चुकाने के बाद भी औद्योगिक भूखंड के कब्जे का इंतजार

News Desk
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ग्रेटर नोएडा। औद्योगिक भूखंडों के लिए यीडा के आवंटियों को इंतजार समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा है। भूखंड की पूरी कीमत वसूलने के बावजूद यीडा आवंटियों को यह तक नहीं बता पा रहा है कि आखिर उन्हें भूखंड पर कब्जा कब तक मिलेगा। जिस जमीन पर भूखंड नियोजित है, वह आज भी यीडा के पास नहीं है। कुछ जमीन रसूखदारों की है, जो यीडा के लिए बड़ी चुनौती है। उद्यमी एक और भूखंड के इंतजार में हैं, वहीं दूसरी और औद्योगिक इकाई विस्तार या जहां संचालित हो रही है, उसका किराया दे रहे हैं।

2020 में औद्योगिक भूखंड किए थे आवंटित

यमुना प्राधिकरण अब तक 3189 औद्योगिक भूखंडों का आवंटन कर चुका है, लेकिन अभी तक 2826 भूखंड ही नियोजित हो पाए हैं। 363 भूखंडों के लिए प्राधिकरण अभी तक जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं कर पाया है। यह हालात तब हैं जब प्राधिकरण आवंटियों से पूरी कीमत वसूल चुका है।

औद्योगिक सेक्टर 29 के एम ब्लाॅक में उद्यमियों को 2020 में औद्योगिक भूखंड आवंटित हुए थे, 2025 तक आवंटियों ने भूखंड की पूरी कीमत का प्राधिकरण को भुगतान कर दिया, लेकिन छह साल में न हो उन्हें भूखंड मिला और न अभी मिलने की कोई उम्मीद नजर आ रही है।

अधिकारियों से संपर्क कर स्पष्टता की मांग की

आवंटियों का कहना है कि देरी के कारण उद्यमियों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कई उद्यमी किराए के परिसर से अपना काम कर रहे हैं। आवंटित भूखंडों पर लिए गए ऋण की ईएमआइ और ब्याज भी चुका रहे हैं। किराया, ऋण की किस्तें और अवरुद्ध पूंजी की लागत वहन करने से उद्यमी पर काफी दबाव है। उद्यमियों का कहना है कि कई बार वे अधिकारियों से संपर्क कर स्पष्टता की मांग कर चुके हैं।

छोटे उद्यमी अनदेखी की मार झेल रहे

उनकी मांग है कि प्राधिकरण उन्हें विकास कार्य पूर्ण होने और कब्जा देने की एक स्पष्ट समय-सीमा बताए, वर्तमान स्थिति के बारे में पारदर्शी जानकारी दे। ताकि उन्हें कुछ उम्मीद बंध चुके। उद्यमियों का कहना है कि प्राधिकरण फिर बड़े निवेश पर फोकस कर रहा है। छोटे उद्यमी अनदेखी की मार झेल रहे हैं।

यीडा एसीईओ शैलेंद्र भाटिया का कहना है कि पिछले दिनों बैठक कर समीक्षा की गई है कि कितने भूखंड अभी नियोजित होने से शेष हैं, उनके लिए जमीन की उपलब्धता की क्या स्थिति है। ताकि प्राथमिकता पर जमीन क्रय कर भूखंड विकसित किए जा सके। विभागों को इस बारे में दिशा निर्देश दिए जा चुके हैंं।

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