गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन में निर्माणाधीन माल की तीसरी मंजिल पर जहां बच्ची के साथ घिनौनी हरकत करने के बाद हत्या की गई वहां पहुंचते ही सन्नाटा ऐसा था कि कदम खुद-ब-खुद धीमे पड़ जाएं।
कमरे में अधूरा निर्माण, लोहे की राड, सीमेंट और धूल के बीच एक ऐसा दृश्य था, जिसने वहां पहुंचे हर व्यक्ति को भीतर तक झकझोर दिया। जहां मासूम से क्रूरता हुई वहां फर्श पर जमे खून के धब्बे पूरी घटना की भयावहता बयान कर रहे थे।
नन्हीं हथेलियों के निशान देख नम हुई आंखें
दीवार पर भी खून के छींटे साफ दिखाई दे रहे थे। ऐसा लग रहा था मानो उस जगह ने हर पल अपनी आंखों में कैद कर लिया हो। कमरे की मिट्टी और धूल के बीच एक निशान सबसे ज्यादा विचलित करने वाला था।
खून से सनी नन्ही उंगलियां जब आखिरी बार जमीन पर टिकी होंगी, तभी मिट्टी पर उनका पूरा निशान उभर गया। वह छोटा सा हाथ अब भी जैसे मदद की आखिरी गुहार लगा रहा था। देर रात वहां मौजूद लोग उस निशान को देखते ही कुछ पल के लिए ठिठक गए। कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
कमरे के हालात बता रहे थे कि बच्ची ने दरिंदे से बचने के लिए अंतिम सांस पर संघर्ष किया होगा। लेकिन जब उसके सिर पर लोहे की राड से वार किया होगा तब उसकी सांसों की डोर टूट गई।
बेसमेंट तक में मिले खून के निशान
कमरे से बाहर निकलने वाली सीढ़ियों पर भी कई जगह खून के धब्बे दिखाई दिए। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि घटना के बाद आरोपित जल्दबाजी में वहां से निकला। नीचे बेसमेंट तक पहुंचने वाले हिस्से में भी खून के निशान मौजूद थे। जहां मासूम का शरीर आकर गिरा, वहां भी लाल धब्बे दिखाई दे रहे थे।
ऊपर की वीरानी और नीचे पसरा सन्नाटा पूरी घटना की भयावहता को और गहरा कर रहा था। निर्माणाधीन परिसर में काम करने वाले लोग शनिवार सुबह तक उस मंजिल की ओर देखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे।
हर किसी की नजर बार-बार उसी मिट्टी पर जाकर ठहर रही थी, जहां खून से सनी नन्ही उंगलियों की छाप अब भी मौजूद थी। वह निशान केवल एक मासूम के हाथ का नहीं, बल्कि उस अमानवीय अपराध का मूक गवाह बन गया है।
शव देखने के बाद से मां-पिता का बुरा हाल
बच्ची के पिता का कहना है कि उनके साथ कई लोग घंटो मासूम को तलाश करते रहे। देर रात उसका शव मिलते ही उनके सब्र का बांध टूट गया। उन्हें लगा कि उनकी बेटी कहीं आसपास ही होगी और कुछ ही देर में आ जाएगी। शव देखते ही उन्हें लगा मानो अपनी नन्हीं परी को अब वह दोबारा नहीं देख पाएंगे।
