समलैंगिक शादियों को कानूनी मान्यता देने की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार होगी सुनवाई

Rohit Kumar
3 Min Read

नई दिल्लीः समलैंगिक विवाह को कानूनी वैधता प्रदान करने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध सोमवार (13 मार्च) को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध मामलों की सूची के अनुसार, समलैंगिक विवाह को वैधता दिये जाने संबंधी याचिकाएं प्रधान न्यायाधीश धनंजय वाई. चन्द्रचूड़, जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस जे. बी. पारदीवाला की पीठ के समक्ष रखी जाएंगी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट सहित देश के सभी उच्च न्यायालयों में लंबित समलैंगिक विवाह से जुड़ी याचिकाओं को एक साथ सम्बद्ध करते हुए अपने पास स्थानांतरित कर लिया था।

अदालत ने कहा था कि केन्द्र की ओर से पेश हो रहे वकील तथा याचिका दायर करने वालों की अधिवक्ता अरुंधति काटजू साथ मिलकर सभी लिखित सूचनाओं, दस्तावेजों और पुराने उदाहरणों को एकत्र करें, जिनके आधार पर सुनवाई आगे बढ़ेगी। पीठ ने छह जनवरी के अपने आदेश में कहा था, ‘‘शिकायतों की सॉफ्ट कॉपी (डिजिटल कॉपी) पक्षकार आपस में साझा करें और उसे अदालत को भी उपलब्ध कराया जाए। सभी याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्ध किया जाए और मामलों में निर्देश के लिए 13 मार्च, 2023 की तारीख तय की जाए।” विभिन्न याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने पीठ से अनुरोध किया था कि वह इस मामले में आधिकारिक फैसले के लिए सभी मामलों को अपने पास स्थानंतरित करे और केन्द्र भी अपना जवाब सुप्रीम कोर्ट में ही दे।

अदालत ने समलैंगिक विवाह को मान्यता देने का अनुरोध करने वाली दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित दो याचिकाओं को अपने पास स्थानांतरित करने के संबंध में 14 दिसंबर, 2022 को केन्द्र सरकार से जवाब मांगा था। गौरतलब है कि 2018 में आपसी सहमति से किए गए समलैंगिक यौन संबंध को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का फैसला सुनाने वाले सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में जस्टिस चन्द्रचूड़ भी शामिल थे।

जस्टिस चन्द्रचूड़ ने पिछले साल नवंबर में केन्द्र को इस संबंध में नोटिस जारी किया था और याचिकाओं के संबंध में महाधिवक्ता आर. वेंकटरमणी की मदद मांगी थी। शीर्ष अदालत की पांच-सदस्यीय संविधान पीठ ने छह सितंबर, 2018 को सर्वसम्मति से ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए देश में वयस्कों के बीच आपसी सहमति से निजी स्थान पर बनने वाले समलैंगिक या विपरीत लिंग के लोगों के बीच यौन संबंध को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था।

Share This Article
Leave a Comment