नोएडा। जिला अस्पताल में अगस्त 2023 में नियम विरूद्ध हुई 17 स्टाफ नर्स और लैब टेक्नीशियन की भर्ती के मामले में तत्कालीन अधिकारियों से लेकर एनएचएम के अधिकारी भी शासन के रडार पर आ गए हैं। तीन साल तक किसके आदेश पर अवैध भर्ती वाले नर्सिंग स्टाफ और टेक्नीशियन के खाते में वेतन भेजा गया, इसकी जांच महानिदेशालय ने शुरू कर दी है।
एनएचएम महानिदेशालय में पत्र भेजा गया
सूत्र बताते हैं कि सरकार को आर्थिक क्षति पहुंचाने का पता करने के लिए लखनऊ के उच्च अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग से भर्ती के महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मांगे हैं। पैसों की गड़बड़ी सामने आने पर अवैध नियुक्ति करने वाले अधिकारी और कर्मचारियों से रिकवरी भी की जा सकती है। सीएमओ कार्यालय से एनएचएम महानिदेशालय में पत्र भेजा गया है।
शासन स्तर से जांच हुई तेज
लखनऊ महानिदेशालय के अधिकारी हैरान हैं कि तीन साल तक बिना जांच पड़ताल के नोएडा के जिला अस्पताल में अवैध नियुक्ति के 17 स्टाफ नर्स एवं लैब टेक्नीशियन के खाते में लाखों रूपये वेतन के रूप में जारी कर दिए गए। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी मिलीभगत के इस खेल में आंख मूंदकर बैठे रहे। गलत तरीके से वेतन भेजने की शासन स्तर से जांच तेज हो गई है।
अवैध भर्ती से वित्तीय घोटाला की आशंका
अस्पताल से लेकर एनएचएम के अधिकारियों की मिलीभगत का पता करने के लिए मिशन निदेशक गंभीरता से जांच करा रही हैं। उधर, जिलाधिकारी ने भी अवैध भर्ती से वित्तीय घोटाला की आशंका होने पर प्रशासनिक स्तर पर जांच कराने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि सीएमओ से पूरे मामले की जानकारी कर गहनता से जांच कराई जाएगी।
वेतन रोकने का आदेश जारी
बता दें कि अस्पताल में तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारियों ने 2023 और 2025 में एनएचएम के तहत 15 स्टाफ नर्स एवं दो लैब टेक्नीशियन की भर्ती की थी। शासन ने इसे अवैध भर्ती मानकर सभी कर्मचारियों का वेतन रोकने का आदेश जारी कर दिया। महानिदेशालय ने अपनी जांच में पाया कि 2023 में नियुक्ति पाने वाले आठ कर्मचारियों को लगभग 58 लाख रुपये वेतन अदा किया जबकि 2025 में 9 स्वास्थ्य कर्मियों के खाते में करीब 21 लाख रुपये ट्रांसफर हुए थे।
“स्टाफ कर्मियों की गलत नियुक्ति से संबंधित सभी दस्तावेज महानिदेशालय भेजे हैं। यदि शासन से रिकवरी के लिए निर्देश मिलेंगे तो आगे कार्रवाई की जाएगी। पूरे प्रकरण में महानिदेशालय में पत्र भेजा गया है।”
-डाॅ. मदन मोहन मणि त्रिपाठी, सीएमओ।

