टूटते रिश्तों में ‘संवाद’ बना सहारा, गाजियाबाद में काउंसलिंग से 849 परिवार फिर हुए एक

News Desk
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गाजियाबाद। कभी मोबाइल पर किसी का संदेश देख लेने की बात पर पति-पत्नी में विवाद बढ़ गया तो कभी घर-परिवार की छोटी सी बात इतनी बड़ी हो गई कि दोनों अलग रहने लगे।

रिश्ते में आई दरार बढ़ते-बढ़ते अलगाव की स्थिति तक पहुंच गई, लेकिन परिवार परामर्श केंद्र (पीपीके) पहुंचने के बाद बातचीत ने फिर रास्ता बनाया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की बात सुनी, अपनी गलतफहमियां दूर कीं और साथ रहने पर राजी हो गए।

ऐसे मामलों में पीपीके की काउंसलिंग टूटते परिवारों को संभालने का प्रयास कर रही है। बीते वर्ष जनवरी से अब तक 849 परिवार विवाद के बाद काउंसलिंग के सहारे एक बार फिर जुड़ गए।

पति-पत्नी के बीच बढ़ते विवाद कई बार रिश्ते को टूटने की कगार पर पहुंचा देते हैं। ऐसे में परिवार परामर्श केंद्र (पीपीके) में होने वाली काउंसलिंग कई परिवारों के लिए रिश्ते बचाने की आखिरी कोशिश साबित हो रही है।

वर्ष 2025 और 2026 के अगस्त तक 20 महीने में पीपीके में 4,671 पारिवारिक विवाद पहुंचे। इनमें काउंसलिंग और आपसी बातचीत के बाद 849 मामलों में सुलह-समझौता हुआ और परिवार साथ रहने को तैयार हुए।

पीपीके में आने वाले मामलों में पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद से लेकर घरेलू कलह और आपसी मतभेद तक शामिल होते हैं। काउंसलिंग के दौरान दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाता है। विवाद की वजह समझने के बाद रिश्ते को बचाने और आपसी सहमति से समाधान निकालने का प्रयास किया जाता है।

केस-1

पत्नी देखती है रील्स, रोटी बनाने में भी आनाकानी

बीते दिनों ही पीपीके में एक मामला ऐसा आया जिसमें पति ने शिकायत दी कि उसकी पत्नी रील्स देखने की आदी है। जब वह शाम को काम से लौटकर आता है तो पत्नी उसे चाय देने की बजाय रील्स देखने में व्यस्त रहती है। रात में डिनर के लिए भी देरी हाे जाती है। जब वह टोकता है तो कई बार दोनों में नोंकझोंक हुई। बड़े विवाद से बचने के लिए उसने काउंसलिंग का सहारा लिया। पीपीके में जब महिला को समझाया गया तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और दंपत्ति सुलह कर अपने घर वापस गए।

केस-2

पति ने कर ली दूसरी शादी, महिला ने खर्चा न देने की शिकायत कर दी

दो माह पूर्व पीपीके में एक मुस्लिम महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि उसका पति कामगार है और दूसरी महिला के चक्कर में पड़ गया और शादी कर उसे घर ले आया। महिला को अपनी सौतन से समस्या नहीं बल्कि उसे खर्चा चाहिए। पीपीके में शिकायत के आधार पर दोनों पक्ष बातचीत के लिए बैठे और महिला का पति खर्चा देने को राजी हुआ तो वह भी कानूनी कार्रवाई करने से पीछे हट गई। दोनों पक्षों में समझौते के बाद मामले का निस्तारण कर दिया गया।

दो माह में निस्तारण का प्रयास

पीपीके में शिकायत के बाद दोनों पक्षों को काउंसलिंग के लिए बुलाया जाता है। काउंसलर पहले पति-पत्नी की बात सुनकर विवाद की मूल वजह समझने का प्रयास करते हैं। इसके बाद दोनों को बातचीत के जरिए एक-दूसरे की बात समझने के लिए प्रेरित किया जाता है। जरूरत पड़ने पर अलग-अलग काउंसलिंग भी होती है। सहमति बनने पर भविष्य में विवाद न बढ़े, इसके लिए दोनों को आपसी समझ और संवाद बनाए रखने के लिए प्रेरित किया जाता है।

नंबर गेम

  • 4,671 मामले पहुंचे बीते वर्ष जनवरी से इस वर्ष अगस्त तक
  • 849 परिवार काउंसलिंग के बाद जुड़ गए
  • 413 मामलों में समझौता नहीं हुआ, पीड़िता की शिकायत पर एफआइआर हुई
  • 656 मामलों में काउंसलिंग जारी है, शीघ्र सुलह की उम्मीद
  • 18 काउंसलर पीपीके में अपनी सेवाएं दे रहे हैं
  • 05 काउंसलिंग कक्ष बने हुए हैं, एक बार में पांच दपत्ति की बातचीत चलती है

पारिवारिक विवाद में संवाद खत्म होना अक्सर समस्या को बढ़ा देता है। परिवार परामर्श केंद्र में दोनों पक्षों को एक-दूसरे की बात समझने और विवाद का शांतिपूर्ण समाधान तलाशने का अवसर दिया जाता है। काउंसलिंग के बाद यदि दंपती आपसी मतभेद दूर कर साथ रहने का निर्णय लेते हैं तो यह परिवार को टूटने से बचाने की दिशा में सार्थक प्रयास है।

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धवल जायसवाल, डीसीपी सिटी

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