राजनगर एक्सटेंशन फ्लैट फर्जीवाड़े में बैंककर्मियों की भूमिका संदिग्ध, 100 खातों की जांच तेज

News Desk
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गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन में फ्लैट और दुकान बुकिंग के नाम पर हुए करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े की जांच कर रही पुलिस को बैंक खातों की पड़ताल के दौरान कुछ बैंककर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध सामने आई है। पुलिस अब बैंककर्मियों पर कार्रवाई से पहले यह पता लगाने में जुटी है कि निवेशकों से ली गई रकम के बड़े लेनदेन के बावजूद संबंधित बैंक खातों पर निगरानी क्यों नहीं की गई और खातों के संचालन में बैंक स्तर से नियमों का कितना पालन हुआ।

पुलिस जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपित नितिन शर्मा उर्फ दीपक शर्मा ने निवेशकों से करोड़ों रुपये लेने के बाद रकम कई अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर की। इनमें कुछ बचत खाते भी शामिल हैं। पुलिस के सामने बड़ा सवाल यह है कि बचत खातों में इतनी बड़ी रकम का लगातार लेनदेन होने के बावजूद बैंक की ओर से कोई सवाल क्यों नहीं उठाया गया।

पुलिस को कुछ दिन पूर्व ऐसे 100 बैंक खाते मिले थे जिनमें दीपक ने निवेशकों से मिली रकम को अन्य खातों में ट्रांसफर किया। इसके बाद धनराशि अन्य कई खातों में ट्रांसफर की गई। इनमें रकम कहां से आई, किसे भेजी गई और खाताधारकों का आरोपितों से क्या संबंध है, इसकी कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।

पुलिस यह भी पता कर रही है कि इन खातों के खाताधारकों की केवाईसी नियमानुसार हुई थी या नहीं। जांच में कुछ ऐसे बैंक खाते भी सामने आए हैं, जिन्हें पुलिस को शुरूआती जांच में फर्जी पाया गया है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि फर्जी खातों को खुलवाने में किसी बैंक कर्मचारी की भूमिका रही या नहीं।

यदि बैंककर्मियों की मिलीभगत या लापरवाही के साक्ष्य मिलते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच कर रही एसआईटी निवेशकों से ली गई रकम के पूरे रूट का पता लगाने में जुटी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बैंक खातों की जांच पूरी होने के बाद फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों और उनकी भूमिका स्पष्ट होगी।

निवेशकों से ली धनराशि को जिन बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया उनकी जांच की जा रही है। खातों में हुए लेनदेन, केवाईसी और खाताधारकों की भूमिका की पड़ताल के बाद संदिग्ध बैंककर्मियों के खिलाफ आगे कार्रवाई की जाएगी।
-जियाउद्दीन अहमद, एसीपी नंदग्राम

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