राजनाथ सिंह के बयान पर राजनीतिक तूफ़ान, विपक्ष ने मांगा सबूत या सफाई

Amit
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नई दिल्ली—रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हालिया वक्तव्य ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। गुजरात के वडोदरा के नजदीक आयोजित ‘एकता मार्च’ के दौरान उन्होंने दावा किया था कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू बाबरी मस्जिद के निर्माण के लिए सरकारी धन का उपयोग करना चाहते थे तथा उस समय इस प्रस्ताव का विरोध सरदार वल्लभभाई पटेल ने किया था।

इस टिप्पणी के सार्वजनिक होने के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर इतिहास को विकृत करने और जानबूझकर नए विवाद खड़े करने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने पलटवार करते हुए कहा कि “ऐसे बयान जनता की वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने की रणनीति का हिस्सा हैं। सरकार को बेरोज़गारी, महंगाई और किसानों के मुद्दों पर जवाब देना चाहिए, न कि नए विवाद गढ़ने चाहिए।”

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “रक्षा मंत्री की प्राथमिकता देश की सुरक्षा चुनौतियाँ होनी चाहिए, न कि ऐतिहासिक घटनाओं का मनमाना विश्लेषण।”

समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने टिप्पणी को ‘अनावश्यक विवाद’ बताते हुए कहा कि “सेना, सीमा सुरक्षा और सैनिकों के कल्याण से जुड़े मुद्दे कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं, जिन पर मंत्री को ध्यान देना चाहिए।”

टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने राजनाथ सिंह से या तो प्रमाण प्रस्तुत करने या फिर बयान वापस लेने की मांग की। वहीं NCP (शरद पवार गुट) की सांसद फौजिया खान ने कहा कि “धार्मिक स्थलों के लिए धन जनसहयोग से जुटना चाहिए, सरकारी बजट का उपयोग किसी भी पूजा स्थल के निर्माण में नहीं होना चाहिए।”

कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने यह चुनौती दी कि यदि कोई ऐतिहासिक दस्तावेज मौजूद है, तो सरकार उसे सार्वजनिक करे। उन्होंने यह भी कहा कि “इतिहास में ऐसे भी दस्तावेज दर्ज हैं जहाँ सरदार पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई की थी, और वह नेहरू सरकार के दौरान ही हुआ था।”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने आरोप लगाया कि “भाजपा सरकार का ध्यान भविष्य की नीतियों पर कम और पुरानी बहसों को हवा देने पर ज्यादा रहता है। नेहरू अब जीवित नहीं हैं, इसलिए उन पर आरोप लगाना राजनीतिक रूप से आसान समझा जाता है।”

राजनीतिक गलियारों में यह बहस अब तेज हो गई है कि क्या रक्षा मंत्री का बयान ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है या यह केवल एक नया राजनीतिक विवाद है। विपक्ष लगातार स्पष्टीकरण की मांग कर रहा है।

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