विश्व हृदय दिवस: हमारी छोटी-छोटी अनदेखी कहीं दिल पर भारी न पड़ जाए

News Desk
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आजकल एक खबर जो हम सब अक्सर सुनते हैं और सुनकर सहम जाते हैं—20-30 साल के किसी नौजवान को अचानक चलते-फिरते या जिम करते हुए हार्ट अटैक आ गया। कभी सोचा है ऐसा क्यों हो रहा है? जिस उम्र में दिल सबसे मजबूत होना चाहिए, उसी उम्र में वह इतना कमजोर क्यों पड़ता जा रहा है?

कैलाश दीपक अस्पताल के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अजय मित्तल से जब हमने इस बारे में बात की, तो उन्होंने एक बहुत ही पते की बात कही। डॉ. मित्तल बताते हैं, “आज की युवा पीढ़ी बहुत ज्यादा तनाव, देर रात तक जागने, बाहर के अनहेल्दी खाने और दिन भर बैठकर काम करने की आदत से जूझ रही है। यही वजह है कि दिल की बीमारियाँ अब उम्र देखकर नहीं आ रहीं।”

लेकिन अच्छी बात यह है कि इसमें डरने के बजाय समझने की जरूरत है। डॉ. अजय मित्तल का कहना है कि युवाओं में होने वाले ज्यादातर हार्ट अटैक से बचा जा सकता है—अगर हम थोड़ी सी सावधानी बरतें।

अक्सर हम कार या बाइक की सर्विसिंग तो समय पर कराते हैं, लेकिन अपने शरीर की नहीं! साल में सिर्फ एक बार बेसिक हेल्थ चेकअप और डॉक्टरी जांच कराने से दिल में पनप रही किसी भी दिक्कत का समय रहते पता चल जाता है और बड़ा खतरा टल जाता है।

एक और बात जो हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं—अचानक से ऐसा लगना जैसे “दिल की एक धड़कन मिस (skip) हो गई” या धड़कन का अजीब तरह से तेज होना। हम सोच लेते हैं कि शायद गैस बन रही होगी, ज्यादा चाय-कॉफी पी ली या थकान होगी। डॉ. मित्तल आगाह करते हैं कि दिल का इस तरह धड़कना हर बार मामूली नहीं होता। यह अंदर किसी छुपी हुई दिल की समस्या या अनियंत्रित धड़कन (Arrhythmia) की शुरुआत हो सकती है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

इस ‘वर्ल्ड हार्ट डे’ पर आइए खुद से और अपने अपनों से एक वादा करें—अपने दिल की बात सिर्फ भावना में ही नहीं, सेहत के मामले में भी सुनेंगे। कोई भी छोटा लक्षण दिखे, तो ढील न दें।

थोड़ी सी सतर्कता और कैलाश दीपक अस्पताल के विशेषज्ञों की सही सलाह से आप अपने दिल को हमेशा मुस्कुराता हुआ रख सकते हैं।
कैलाश दीपक अस्पताल, दिल्ली

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