अनानास की पत्तियों से तैयार प्रीमियम कपड़ा ‘पीन्या’ दिल्ली में बना चर्चा का विषय

News Desk
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नई दिल्ली। त्रिपुरा के हुनरमंद बुनकरों द्वारा पारंपरिक अबाका (केले के रेशों की) कला को अनानास की पत्तियों पर उतारकर तैयार की गई पारदर्शी, राजसी और सुनहरी चमक वाला कपड़ा ”पीन्या” दिल्ली वालों को भी दंग कर रहा है। त्रिपुरा वैश्विक अनानास महोत्सव में उसे देखने और खरीदने वाले उमड़ रहे हैं।

मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में शनिवार से शुरू हुए इस तीन दिवसीय महोत्सव में ऐसे ही अद्भूत उत्पादों की पेशकश है। एक स्टाल पर ””पीन्या”” से तैयार परिधानों व रेशों वाले स्टाल पर आरएनजे एग्री क्लिनिक और एग्री बिजनेस एसोसिएट के निदेशक नीरज झा बताते हैं कि पत्ती को मखमली लिबास में ढालने का यह सफर पूरी तरह हाथों के जादू पर टिका है। उससे तैयार शर्ट दो से ढाई हजार रुपये में उपलब्ध है।

जादुई कढ़ाई से कपड़े को देते हैं मुकम्मल रूप

स्टाल पर बुनकर बताते हैं कि अनानास के पत्तों को चीनी मिट्टी की टूटी प्लेट और नारियल के टुकड़ों से ध्यानपूर्वक छीला जाता है। यह काफी बारीक प्रक्रिया है। उसके बाद मोटे बास्तोस (पौधों के तने की भीतरी छाल से प्राप्त प्राकृतिक रेशे) और तने से निकलने वाले ””रेशमी लिनुआन रेशे”” अलग किए जाते हैं।

बुनकरों की असल परीक्षा उसकी धुलाई और सुखाने के बाद शुरू होती है। तब बिना किसी मशीन के वह एक- एक रेशे को हाथ से गांठ बांधकर लंबा धागा तैयार करते हैं। फिर करघे पर बुनाई और ””सुक-सुक”” कला की जादुई कढ़ाई से एक कपड़े को मुकम्मल रूप देते हैं।

वैसे, यह कला फिलीपींस की है, जो अब देश में कृषि और स्टार्टअप जगत के लिए वरदान बन रही है। आधुनिक अनानास फ्लास तकनीक के जरिए इस कला को नया रूप मिला है। उद्यमी नीरज झा जैसे युवा अब इन बेकार पत्तियों से प्रीमियम हैंडबैग और होम डेकोर के नायाब उत्पाद बना रहे हैं।

दक्षिण भारत के टेक्सटाइल हब तमिलनाडु के कोयम्बटूर में इन विशेष कपड़ों की मांग अधिक है। जुड़े लोग बताते हैं कि यह उत्पाद पूरी तरह पर्यावरण हितैषी है। जो पत्तियां, कचरा थीं और खेतों में जला दी जाती थी, अब वह रोजगार पैदा कर रही है।

अनानास की मीठी महक से गमक रहा महोत्सव

यह महोत्सव अनानास की मीठी महक से गमक रहा है। शनिवार को असम के मुख्यमंत्री डा. माणिक साहा और केंद्रीय राज्य मंत्री डा. सुकांत मजूमदार ने महोत्सव का शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि त्रिपुरा सालाना 1.78 से 1.87 लाख मीट्रिक टन अनानास उत्पादित करता है, जिसमें 23 हजार मीट्रिक टन जीआई-टैग प्राप्त क्वीन अनानास शामिल है।

यह उत्सव राज्य के निर्यात, संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देगा। डा. मजूमदार ने 236 करोड़ रुपये के मिशन क्वीन पाइनएप्पल का जिक्र किया, जो 2028 तक इसकी अर्थव्यवस्था को 35 करोड़ रुपये से 200 करोड़ रुपये पर ले जाएगा। वहीं, पहले दिन महोत्सव में आए लोगों को निशुल्क अनानास भी वितरित किया गया। इसके साथ ही लोगों ने मीठे- मीठे अनानास का स्वाद भी चखा।

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