ममूरा अग्निकांड के बाद भी नहीं बदली तस्वीर, अवैध पीजी पर कार्रवाई शून्य

News Desk
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नोएडा। लखनऊ में 22 जून को आग की घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अवैध इमारतों में संचालित गतिविधियों पर रोक के निर्देश दिए गए थे। निर्देश के बाद नोएडा, ग्रेटर नोएडा में भी अवैध इमारतों पर कार्रवाई के लिए फाइलों में आदेश हुए, लेकिन धरातल पर अभी तक नहीं उतर सकें हैं।

इसी बीच 15 जुलाई को ममूरा गांव में एक अवैध पीजी में आग की घटना हो गई। युवती समेत दो को असमय मौत का शिकार होना पड़ा। मुख्यमंत्री कार्यालय से फिर कार्रवाई के आदेश हुए, लेकिन जिम्मेदार सिस्टम अब तक खामोश है। दोनों शहरों में हर सेक्टर और गांव में अवैध पीजी, जिम, कोचिंग सेंटर व गेस्ट हाउस आदि चल रहे हैं। किसी में भी आग से बचाव अन्य सुरक्षा के पूर्ण इंतजाम नहीं है।

ममूूरा गांव में जिस पीजी में आग की घटना हुई थी, उसके आसपास भी बड़ी संख्या में अवैध पीजी बने हैं। कई दिन जिम्मेदार वहां पहुंचे पर कोई कार्रवाई नहीं।

आदेश फाइलों से बाहर नहीं निकल सकें

बता दें कि 22 जून को लखनऊ के एक व्यवसायिक भवन में आग की घटना में 15 लोगों की मौत के बाद मुख्यमंत्री ने अवैध पीजी, कोचिंग सेंटर, मॉल, गेस्ट आदि, जिम व अन्य इमारतों में जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।। नोएडा, ग्रेटर नोएडा में यह आदेश फाइलों से बाहर नहीं निकल सकें।

नतीजन ममूरा गांव में अवैध पीजी में ई-स्कूटी में चार्जिंग के दौरान आग लग गई। इसकी चपेट में आने से दो की मौत हो गई थी। इससे पहले भी सेक्टर-46 स्थित गेस्ट हाउस व गिझोड़ गांव स्थित एक इमारत में भी आग लग चुकी है। सवाल उठा था कि आवासीय मकान में व्यावसायिक गेस्ट हाउस व अन्य गतिविधि कैसे चल रही है।

मामूरा में जिस बिल्डिंग में आग लगी, वे भी नियमों की अनदेखी की मिसाल थी। पार्किंग को कमरे में तब्दील कर दिया गया, ई-वाहन चार्जिंग की कोई अलग व्यवस्था नहीं, फायर एग्जिट नहीं। प्राधिकरण ने जांच और नोटिस के अलावा कोई बड़ा अभियान नहीं चलाया। आवासीय कालोनियों और सेक्टरों में अवैध गतिविधि संचालकों पर वही पुरानी उदासीनता।

नोएडा प्राधिकरण से लापता पत्र का अभी तक नहीं लिया संज्ञान

मुख्यमंत्री के 22 जून के आदेश के बाद जिलाधिकारी मेधा रूपम ने कार्रवाई के लिए नोएडा प्राधिकरण को पत्र लिखा था। प्राधिकरण पहुंचते ही पत्र लापता हो गया। इसका अभी तक संज्ञान नहीं लिया गया है। जिन कर्मचारियों ने पत्र लापता किया, उनकी पहचान तक नहीं की गई है। जिलाधिकारी से फिर से पत्र भेजने का अनुरोध भी नहीं किया गया है।

नोएडा, ग्रेटर नोएडा में अवैध इमारतों में चल रही गतिविधियों के संचालन पर रोक और कार्रवाई करने की जिम्मेदारी प्राधिकरणों की है। इमारत बनाने के लिए प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत कराना होता है। आग से बचाव के इंतजाम करने होते हैं। नक्शा पास नहीं, उपयोग बदल दिया गया, फिर भी बिजली-पानी सब मिल रहा है। प्राधिकरण स्तर से कोई कार्रवाई नहीं। मथुरा में प्रशासन ने 6 होटल-गेस्ट हाउस सील किए, 10 को अल्टीमेटम दिया। नोएडा में अब तक वैसा एक्शन क्यों नहीं? यह बड़ा सवाल है।

पुराने ढर्रे पर लौटा सिस्टम

मामूरा की राख अभी ठंडी भी नहीं हुई और सिस्टम फिर उसी पुराने ढर्रे पर लौट आया। लखनऊ से आदेश हुए, लेकिन प्राधिकरणों की मेज तक आते-आते उनकी स्याही सूख गई। अवैध पीजी, कोचिंग सेंटर व जिम आदि पर कार्रवाई के लिए न तो कोई योजना है और न ही अधिकारी कुछ बोलने को तैयार है।

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