नोएडा में आबकारी नियमों पर सवाल, बाल संप्रेषण गृह के नीचे बिक रही शराब

News Desk
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नोएडा। आबकारी नीति कमाई का जरिया बनती नजर आ रही है। 100 मीटर के दायरे में कई शराब के ठेके संचालित हो रहे हैं। कई स्थानों पर फुटपाथ और अस्थाई टीन शेड की दुकानों में शराब बेचने का लाइसेंस दे दिया गया है।

नोएडा में फेज-2 के सेक्टर-80 में पहली मंजिल पर बाल संप्रेषण गृह (किशोर) हैं। इनके नीचे शराब की दुकान संचालित हो रही है।

शराब की दुकान हटाने के लिए पत्र लिखा

किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट अभिषेक कुमार-4 ने जिलाधिकारी गौतमबुद्ध नगर को शराब की दुकान हटाने के लिए पत्र लिखा है। शिकायत की कॉपी किशोर न्याय समिति की लखनऊ हाई कोर्ट बेंच, जिला आबकारी अधिकारी को भी प्रेषित की गई है।

यहां पर 102 किशोर रह रहे

बता दें फेज-2 के बाल संप्रेषण गृह (किशोर) में गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद और सहारनपुर में हुए अपराधों में शामिल किशोर रहते हैं। मौजूदा समय में यहां पर 102 किशोर रह रहे हैं। बाल संप्रेषण गृह के नीचे ग्राउंड फ्लोर पर शराब की दुकान संचालित हो रही है। यह दुकान किशाेरों पर दुष्प्रभाव की वजह बन रही है।

किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट ने जिलाधिकारी को लिखे पत्र में कहा कि यहां रह रहे बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को खतरे में डालने वाली यह दुकान अधिनियम का सीधा उल्लंघन है। आबकारी नीति का यहां उपयोग नहीं हुआ।

200 मीटर के दायरे में शराब की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित

पत्र में किशोर न्याय अधिनियम-2015 की धारा 77 का हवाला देते हुए चेतावनी दी गई है कि किसी भी बच्चे को शराब या नशीला पदार्थ बेचना या उपलब्ध कराना गंभीर दंडनीय अपराध है। अधिनियम के मॉडल रूल्स-2016 के नियम-58(10) के अनुसार बच्चों के निवास स्थान के 200 मीटर के दायरे में शराब की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश एक्साइज शापप रूल्स-1968 के नियम-5(4) का भी जिक्र किया गया है, जिसमें स्कूल, अस्पताल, पूजा स्थल या आवासीय इलाके के निकट नई शराब दुकान खोलने पर रोक लगाई गई है।

प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी 

बोर्ड ने स्पष्ट किया कि बाल गृह के आसपास शराब की उपलब्धता बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है। प्रधान मजिस्ट्रेट अभिषेक कुमार ने लिखा कि बच्चों का सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसलिए जिला प्रशासन से अपील की गई है कि वह अधिनियम के प्रावधानों के तहत त्वरित कार्रवाई करे।

शिकायत की कापी मिली है। यह जिलाधिकारी को भेज दी गई है। इस पर एक से दो दिन में निर्णय हो जाएगा। मैंने मौके पर जाकर दूसरी जगह भी देखी है। कमर्शियल काम्प्लेक्स में पूर्व से संचालित यह दुकान कई वर्ष पुरानी है। बाल संप्रेक्षण गृह का रास्ता भी अलग से है। – सुबोध कुमार, जिला आबकारी अधिकारी, गाैतमबुद्ध नगर

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