
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं को लेकर एक गंभीर स्थिति सामने आई है. वर्ष 2025-26 में दिल्ली फायर सर्विस को 36,877 आपातकालीन कॉल प्राप्त हुईं, जो बीते छह वर्षों में सबसे अधिक आंकड़ा है. इनमें से लगभग 55.26 प्रतिशत कॉल सीधे तौर पर आग लगने की घटनाओं से जुड़ी थीं, जबकि शेष कॉल पशु-पक्षी बचाव व अन्य आपातकालीन स्थितियों से संबंधित थीं.
इस बढ़ती चुनौती और शहर की परिचालन तैयारियों की समीक्षा के लिए दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने शुक्रवार को एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की. इस बैठक में दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद, मुख्य सचिव, एमसीडी आयुक्त, दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त, गृह विभाग के प्रधान सचिव, राजस्व आयुक्त, डीडीए के उपाध्यक्ष तथा दिल्ली फायर सर्विस के प्रधान निदेशक व मुख्य अग्निशमन अधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
99% आग हादसों वाले परिसरों के पास नहीं था एनओसी
बैठक के दौरान प्रस्तुत आंकड़ों में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ. दिल्ली में हुए कुल आग हादसों में से लगभग 99 प्रतिशत हादसे उन परिसरों में हुए जिनके पास वैध ‘फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट’ (NOC) नहीं था. विशेष रूप से अनधिकृत और अनियोजित कॉलोनियों व इमारतों में संकरे रास्तों और पर्याप्त पहुंच न होने के कारण फायर टेंडर समय पर नहीं पहुंच पाते. इसके अलावा, स्वीकृत लोड से अधिक बिजली का उपयोग और ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण भी नियोजित क्षेत्रों तक में आग लगने की मुख्य वजह बन रहा है.
जागरूकता अभियानों पर जोर
सघन और अनधिकृत निर्माण जैसी व्यावहारिक बाधाओं को देखते हुए उपराज्यपाल ने निर्देश दिया कि दिल्ली फायर सर्विस को केवल राहत कार्य तक सीमित न रहकर निरंतर और सक्रिय जागरूकता अभियान चलाना चाहिए. उन्होंने कहा कि छात्रों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस, इंडस्ट्रियल एसोसिएशंस और मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशंस को इस अभियान से जोड़ा जाए, ताकि नागरिक स्वयं आग से बचाव के लिए सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच बन सकें.
जोन-वार एक्शन प्लान और रिस्पॉन्स टाइम घटाने के निर्देश
उपराज्यपाल ने दिल्ली फायर सर्विस के रिस्पॉन्स टाइम की गहन समीक्षा करने के निर्देश दिए. घनी आबादी वाले क्षेत्रों, औद्योगिक क्लस्टरों और बहुमंजिला इमारतों के लिए मापने योग्य लक्ष्यों के साथ एक जोन-वार एक्शन प्लान तैयार करने को कहा गया है. मास्टर प्लान के तहत 5 मिनट के रिस्पॉन्स टाइम के लिए कम से कम 120 फायर स्टेशनों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में दिल्ली में केवल 71 फायर स्टेशन (चार डे-टाइम स्टेशनों सहित) ही कार्यरत हैं.
50 नए फायर स्टेशनों की योजना और भूमि हस्तांतरण
नेटवर्क विस्तार के लिए कुल 121 फायर स्टेशन बनाने का लक्ष्य रखा गया है. उपराज्यपाल ने संबंधित एजेंसियों (DDA और राजस्व विभाग) को निर्देश दिया कि नए फायर स्टेशनों के लिए भूमि आवंटन प्रक्रिया में तेजी लाई जाए. 23 नए स्टेशनों के लिए जमीन मिल चुकी है, जबकि शेष 27 स्टेशनों के लिए भूमि आवंटन जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं.
आधुनिकीकरण, भर्ती प्रक्रिया और हाई-टेक कंट्रोल रूम
आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने के लिए एलजी ने जनशक्ति की कमी को दूर करने हेतु भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने और आवश्यक उपकरणों की खरीद को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए. DFS ने 197 नए वाहनों/उपकरणों की खरीद की योजना पेश की, जिसमें 9 आर्टिकुलेटेड वॉटर टावर शामिल हैं. साथ ही, ब्लैकआउट की समस्या से निपटने के लिए जीआईएस (GIS) आधारित वाहन ट्रैकिंग, कंप्यूटर-एडेड डिस्पैच सिस्टम, लाइव स्ट्रीमिंग सुविधा, नागरिकों के लिए मोबाइल ऐप और एकीकृत यूएचएफ/आरएफ नेटवर्क से लैस एक एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र स्थापित किया जाएगा.
