अब सभी व्यावसायिक वाहनों को देना होगा पर्यावरण शुल्क, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Amit
3 Min Read

दिल्ली- दिल्ली में वायु प्रदूषण पर काबू पाने और प्रशासनिक जटिलताओं को कम करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्णय लिया है। कोर्ट ने आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई करने वाले व्यावसायिक वाहनों को दी जा रही पर्यावरण शुल्क (ईसीसी) की छूट को समाप्त कर दिया है। इस आदेश के लागू होने से दिल्ली सरकार को हर साल लगभग ₹100 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा, जो अभी तक मिलने वाले ₹120 करोड़ के अलावा होगा।

अब नहीं मिलेगी छूट आवश्यक वस्तुओं को ढोने वाले ट्रकों को

2015 से लागू उस नीति को अब खत्म कर दिया गया है जिसमें फल, सब्जी, दूध, अनाज, अंडे, पोल्ट्री उत्पाद, नमक और बर्फ जैसी जरूरी वस्तुएं ढोने वाले वाहनों को पर्यावरण शुल्क से मुक्त रखा गया था। अब यह सभी वाहन भी शुल्क के अंतर्गत आएंगे। इतना ही नहीं, खाली या आंशिक रूप से भरे ट्रक भी इस शुल्क से अछूते नहीं रहेंगे।

एमसीडी की दलील को माना गया

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने कोर्ट के सामने यह तर्क रखा कि शुल्क से छूट प्राप्त वाहनों की पहचान करना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। बाहर से देखकर किसी भी ट्रक में भरे सामान की प्रकृति जान पाना कठिन होता है, जिससे हर वाहन की जांच करनी पड़ती है। इस प्रक्रिया से न केवल यातायात जाम होता है, बल्कि चेक-पोस्ट पर खड़े ट्रकों से निकलने वाला धुआं भी वायु प्रदूषण को बढ़ाता है। कोर्ट ने इन बातों को संगत मानते हुए छूट को समाप्त कर दिया।

नियम सरल, व्यवस्था सुचारु

अब सभी व्यावसायिक वाहनों को पर्यावरण शुल्क देना होगा, जिससे चेक-पोस्ट पर जांच की आवश्यकता नहीं रहेगी। इससे ट्रकों की आवाजाही तेज होगी, जाम की समस्या कम होगी और वायु प्रदूषण पर भी नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी।

सरकार को मिलेगा अतिरिक्त राजस्व

इस बदलाव से दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग को हर साल ₹100 करोड़ अतिरिक्त मिलने की संभावना है। सरकार इस राशि का इस्तेमाल प्रदूषण नियंत्रण परियोजनाओं में कर सकेगी। वहीं, एमसीडी को भी जांच जैसी प्रशासनिक चुनौतियों से मुक्ति मिलेगी, जिससे विवाद और बहसबाज़ी की घटनाएं घटेंगी।

Share This Article
Leave a Comment