दिल्ली स्वास्थ्य विभाग पर शिकंजा, खरीद में देरी और अनियमितताओं को लेकर स्वास्थ्य सचिव को नोटिस

News Desk
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नई दिल्ली: दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक व्यवस्था और चिकित्सा उपकरणों की खरीद-फरोख्त को लेकर मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. सरकारी अस्पतालों में दवाइयों, कंज्यूमेबल्स और मेडिकल उपकरणों की खरीद में बार-बार हो रही अत्यधिक देरी को बेहद गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य सचिव रूपेश कुमार ठाकुर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. इस प्रशासनिक कार्रवाई के साथ ही ओआरएस के पैकेट से लेकर पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों तक की खरीद प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं, जिसकी विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं.

बार-बार निर्देश के बावजूद जवाब न देने पर नाराजगी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाले विभिन्न अस्पतालों और संस्थानों में जरूरी दवाओं व उपकरणों की लंबित खरीद प्रक्रियाओं के लिए विभाग से कई बार व्यापक एक्शन प्लान और आइटम-वाइज टाइमलाइन की मांग की गई थी. इस सिलसिले में सबसे पहले 28 मई को आधिकारिक तौर पर एक्शन प्लान मांगा गया था. इसके बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 17 जून को दोबारा निर्देश जारी कर 19 जून तक रिपोर्ट पेश करने को कहा गया था. तय समय सीमा में अनुपालन न होने पर 22 जुलाई को तीसरा रिमाइंडर भी भेजा गया. हालांकि, बार-बार के निर्देशों और स्मरण पत्रों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई भी संतोषजनक या ठोस जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया.

शीर्ष स्तर पर इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना गया है, जिसका सीधा और नकारात्मक असर राजधानी के सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह द्वारा जारी किए गए नोटिस में स्वास्थ्य सचिव से मुख्य रूप से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि आखिर क्यों इन निर्देशों का समय पर पालन नहीं किया गया और एक्शन टेकन रिपोर्ट क्यों नहीं भेजी गई? साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्यों न इस सिलसिले में दोषी और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ निर्धारित सेवा नियमों के तहत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जाए.

ओआरएस और पोर्टेबल एक्स-रे मशीन खरीद जांच के दायरे में

नोटिस और जांच के दायरे में केवल प्रशासनिक सुस्ती ही नहीं, बल्कि कई चिकित्सा सामग्रियों और उपकरणों की खरीद में बरती गई कथित अनियमितताएं भी शामिल हैं. ओआरएस (ORS) खरीद, स्वास्थ्य मंत्री द्वारा जारी किए गए नोटिस में जीवन रक्षक और सामान्य माने जाने वाले ओआरएस सैशे की खरीद प्रक्रिया पर गहरी आपत्ति जताई गई है. इसमें मुख्य रूप से यह सवाल उठाया गया है कि 15 रुपये प्रति सैशे की ऊंची दर से ओआरएस की खरीद किस आधार पर की गई, इसका वित्तीय रिकॉर्ड कहां है और यह ठेका किस वेंडर को आवंटित किया गया था.

अस्पताल की बेडशीट, इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में बड़े पैमाने पर की गई लगभग 16 लाख बेडशीट की खरीद का पूरा ब्योरा भी तलब किया गया है. इसकी तुलना अन्य सरकारी विभागों और अस्पतालों में समान गुणवत्ता वाली बेडशीट की खरीद दरों से करने के निर्देश दिए गए हैं.

पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें, जांच का दायरा अत्याधुनिक हैंडहेल्ड पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की खरीद तक पहुंच गया है. शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, इन मशीनों की खरीद लगभग 33 लाख रुपये प्रति मशीन की दर से किए जाने के आरोप सामने आए हैं, जो अन्य सरकारी संस्थानों और बाजार दरों की तुलना में काफी ज्यादा बताए जा रहे हैं. विभाग से इन मशीनों की तकनीकी विशिष्टताओं और तुलनात्मक खरीद का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है.

5 अगस्त तक मांगी गई तथ्यात्मक रिपोर्ट

प्रशासनिक हलचल तेज करते हुए इस पूरे मामले की प्रति उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भी सूचनार्थ भेज दी गई है. स्वास्थ्य विभाग को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वह निर्धारित समयावधि यानी 5 अगस्त तक इस मामले में अपना विस्तृत जवाब और तथ्यात्मक एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करे. यदि तय समय के भीतर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ शिकंजा कसते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा.

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