नोएडा। नोएडा में निर्माण और विध्वंस स्थल वायु प्रदूषण करने में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं। इन स्थलों का चयन कर एक सूची तैयार की गई है। इन स्थलों का निरीक्षण किया जा रहा है। बता दें कि हर साल वायु प्रदूषण में निर्माण और विध्वंस साइट्स अपना 60 प्रतिशत हिस्सा अदा करता है। सेक्टर 150,142,140,94,125 कई सेक्टरों में सालों से कार्य चल रहा है।
कई बार नियमों को ताक पर रखते हुए कार्य चलने से इन क्षेत्र में लोगों का खुले में सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इन हालातों को देखते हुए निर्माण और विध्वंस स्थलों से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम के लिए लगाई गई निगरानी व्यवस्था को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) से साक्ष्य मांगे हैं। इसके बाद बोर्ड ने निर्माण एवं विध्वंस स्थलों का निरीक्षण कर पीटीजेड (पैन-टिल्ट-जूम) कैमरों की स्थिति की जांच शुरू की है।
अब तक करीब 181 साइट्स का निरीक्षण किया गया
बोर्ड की ओर से अब तक करीब 181 साइट्स का निरीक्षण किया गया है। निरीक्षण के दौरान 30 साइट्स पर पीटीजेड कैमरे नहीं लगे मिले या कैमरे कार्य करने की स्थिति में नहीं पाए जाने पर शो काज नोटिस जारी किया है। वहीं बकाया साइट्स के संचालकों को भी नोटिस जारी किया है। कुल 180 साइट्स पर नियमों के अनुपालन में लापरवाही मिलने पर संबंधित साइट संचालकों को नोटिस जारी किए गए हैं।
साइट्स का औचक निरीक्षण कर कैमरे से निगरानी हो रही
बोर्ड अपनी टीम के साथ इन साइट्स का औचक निरीक्षण कर कैमरे से निगरानी हो रही है या नहीं इसका वीडियो और फोटो के रूप में साक्ष्य एकत्रित कर एनजीटी को भेजेगा। यूपीपीसीबी अधिकारियों के अनुसार, निर्माण और विध्वंस गतिविधियों के दौरान धूल एवं अन्य प्रदूषणकारी तत्वों के उत्सर्जन पर निगरानी रखने के लिए कैमरा व्यवस्था महत्वपूर्ण है।
कैमरों के माध्यम से साइट की गतिविधियों पर नजर रखने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई करने में मदद मिलती है। अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी कवायद निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने और एनजीटी के निर्देशों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जा रही है।
बोर्ड का निरीक्षण अभियान लगातार जारी है। जिन साइट्स पर निर्धारित पर्यावरणीय मानकों और निगरानी व्यवस्था का पालन नहीं पाया जा रहा है, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। – रितेश कुमार तिवारी, क्षेत्रीय अधिकारी, यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
