नई दिल्ली। चिकित्सा शिक्षा केवल उपचार ही नहीं, सही खानपान और जीवनशैली भी सिखाए, इसे भी चिकित्सा शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। यह बात नीति आयोग के सदस्य डा. एम. श्रीनिवास ने एम्स के शरीर क्रिया विज्ञान विभाग की ओर से फूड फ्यूचर फाउंडेशन और कोएलिशन फार फूड सिस्टम्स ट्रांसफार्मेशन इन इंडिया (कोफ्टी) के सहयोग से ‘लाइफस्टाइल एंड डाइट : न्यूट्रिशन, वेलनेस एंड क्लीनिकल प्रैक्टिस’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में कही।
उन्होंने कहा कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पोषण, संतुलित खानपान और स्वस्थ जीवनशैली को चिकित्सा शिक्षा और इलाज का अहम हिस्सा बनाना होगा।
संगोष्ठी में एम्स के कार्यकारी निदेशक डा. निखिल टंडन, एसोसिएट डीन (रिसर्च) डा. गोविंद मखारिया, फूड फ्यूचर फाउंडेशन के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी पवन अग्रवाल सहित देशभर के चिकित्सक, पोषण विशेषज्ञ, चिकित्सा शिक्षक और नीति निर्माता शामिल हुए।
स्वस्थ जीवनशैली बेहतर स्वास्थ्य की बुनियाद
संगोष्ठी में ‘न्यूट्रिशन, डाइट एंड लाइफस्टाइल : लर्निंग एंड टीचिंग डाइट, फूड, न्यूट्रिशन एंड लाइफस्टाइल इन क्लीनिकल प्रैक्टिस’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया। डा. श्रीनिवास ने कहा कि वैज्ञानिक शोध स्पष्ट करते हैं कि अच्छा भोजन, सही पोषण और स्वस्थ जीवनशैली बेहतर स्वास्थ्य की बुनियाद हैं, लेकिन मेडिकल शिक्षा में इन विषयों को अभी भी पर्याप्त महत्व नहीं मिलता।
एम्स के शरीर क्रिया विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डा. रत्ना शर्मा ने कहा कि पोषण विज्ञान और लाइफ स्टाइल मेडिसिन में तेजी से हो रहे नए शोधों के अनुरूप चिकित्सा शिक्षा में बदलाव जरूरी है। पुस्तक के प्रमुख संपादक प्रो. डा. राज कुमार यादव ने कहा कि अब चिकित्सकों को दवा के साथ मरीजों को खानपान और जीवनशैली संबंधी सलाह भी नियमित रूप से देनी चाहिए।
संगोष्ठी में बच्चों में मिर्गी, आटिज्म, मोटापा, चयापचय संबंधी रोग, मांसपेशियों के स्वास्थ्य, मोटापा और मस्तिष्क की सूजन जैसे विषयों पर चर्चा हुई। भोजन में नमक की मात्रा कम करने के लिए मोनोसोडियम ग्लूटामेट (एमएसजी) के उपयोग पर भी वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन प्रस्तुत किए।

