नई दिल्ली। राजधानी में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या को कम करने के लिए दिल्ली सरकार की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। सरकार ने दावा किया है कि कि शहर के 90 प्रतिशत से अधिक नालों की डी-सिल्टिंग (गाद निकालने) का कार्य पूरा कर लिया गया है।
इसके साथ ही जलभराव संभावित 445 स्थानों की पहचान कर वहां विशेष निगरानी और त्वरित राहत व्यवस्था की गई है। 2023 में यमुना में आई भारी बाढ को देखते हुए यमुना किनारे आठ तटबंध तैयार किए गए हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर बाढ़ नियंत्रण कार्यों में सेना की सहायता लेने की भी व्यवस्था की गई है।
लोक निर्माण विभाग
सरकार के आंकड़ों के अनुसार लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने 2,123 किलोमीटर लंबे नालों में से लगभग 1,955 किलोमीटर की सफाई पूरी कर ली है। जिसमें पूर्वी जोन में 539.34 किलोमीटर, दक्षिण जोन में 603 किलोमीटर और उत्तरी जोन में 812 किलोमीटर तक नालों से गाद निकाली जा चुकी है।
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने अपने अधीन 77 प्रमुख नालों से गाद निकालने का 93 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया है। विभाग ने अब तक 31 लाख मीट्रिक टन से अधिक गाद निकाली है। विभाग के पास कुल 382 किलोमीटर लंबे नालों का जिम्मा है, जिनमें नजफगढ़ नाला, बारापुला नाला और दिल्ली गेट नाला प्रमुख हैं।
नगर निगम
नगर निगम ने भी अपने पहले चरण के लक्ष्य से अधिक उपलब्धि हासिल की है। 25 जून तक निगम ने 793 बड़े नालों से 1.70 लाख मीट्रिक टन गाद हटाई, जो निर्धारित लक्ष्य का 125.88 प्रतिशत है। वहीं 12,892 छोटे नालों से 29,686.83 मीट्रिक टन गाद निकालकर 114.84 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया।
नई दिल्ली नगर पालिका परिषद
नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) ने अपने क्षेत्र में सभी 7,888 बेल-माउथ और 4,833 गली ट्रैप की 100 प्रतिशत सफाई पूरी कर ली है। इसके अलावा 340 वर्षा जल संचयन प्रणालियों में से 337 की सर्विसिंग कर 99.12 प्रतिशत कार्य पूरा किया गया है। जनवरी से जून 2026 के बीच एनडीएमसी क्षेत्र से कुल 885 घन मीटर गाद हटाई गई।
बता दें कि संवेदनशील क्षेत्रों में अस्थायी पंप, स्वचालित पंपिंग स्टेशन और क्विक रिस्पांस टीमों की तैनाती की गई है ताकि वर्षा के दौरान पानी की निकासी तुरंत सुनिश्चित की जा सके।
मानसून के दौरान निगरानी और त्वरित कार्रवाई के लिए सरकार ने 16 फ्लड कंट्रोल पोस्ट स्थापित किए हैं। इनमें नौ यमुना नदी के किनारे, चार नजफगढ़ नाले पर, दो सप्लीमेंट्री ड्रेन पर और एक जहांगीरपुरी ड्रेन के पास बनाया गया है। इसके अलावा यमुना किनारे आठ तटबंध तैयार किए गए हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर बाढ़ नियंत्रण कार्यों में सेना की सहायता लेने की भी व्यवस्था की गई है।
सरकार की प्राथमिकता ड्रेनेज नेटवर्क को पूरी तरह कार्यशील बनाना है ताकि भारी वर्षा के दौरान भी जलभराव से लोगों को परेशानी न हो। इसके लिए अतिरिक्त मानव संसाधन लगाए गए हैं और तय समयसीमा के अनुसार काम तेजी से चल रहा है। मैंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि निकाली गई गाद का ठीक तरीके से निस्तारण किया जाए ताकि वह दोबारा नालों में न पहुंचे। – प्रवेश वर्मा, मंत्री, पीडब्यूडी,सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण

