
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली हो या देश के अन्य राज्य, आए दिन आगजनी से संबंधित दिलदहला देने वाली खबरें सामने आते रहती है. कभी किसी रिहायशी इमारत में शॉर्ट सर्किट से आग लग जाती है, तो कभी फैक्ट्रियों या कमर्शियल बिल्डिंग्स में लापरवाही की वजह से मासूम लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं. इन तमाम हादसों का जब बारीकी से विश्लेषण किया जाता है तो एक बेहद डरावना सच सामने आता है. अधिकांश मामलों में लोगों की मौत आग की लपटों से ज्यादा, समय पर जानकारी न मिलने व धुएं में दम घुटने की वजह से होती है.
भारतीय घरों में फायर डिटेक्टर (धुआं पहचानने वाले अलार्म) व वॉटर स्प्रिंकलर (पानी छिड़कने वाले सिस्टम) न होने के कारण लोगों को घर से बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिल पाता और आग लगने पर उनकी जान चली जाती है. इस जानलेवा ढर्रे को बदलने के लिए दिल्ली फायर सर्विस (डीएफएस) ने एक बेहद महत्वपूर्ण व ऐतिहासिक कदम उठाया है.
डीएफएस के चीफ फायर आफिसर एके मलिक ने बताया कि विभाग की तरफ से ‘भारत विकसित हर घर सुरक्षित’ योजना का एक विस्तृत ड्राफ्ट तैयार कर दिल्ली सरकार को भेजा गया है. इस दूरगामी योजना का मुख्य उद्देश्य राजधानी दिल्ली के प्रत्येक घर को आग से पूरी तरह सुरक्षित बनाना है. इस प्रस्ताव में सिफारिश की गई है कि दिल्ली के सभी मकानों, चाहे वे बहुमंजिला इमारत हों या रिहायशी कॉलोनियों के सामान्य घर सब में फायर डिटेक्टर और स्प्रिंकलर सिस्टम लगाना पूरी तरह से अनिवार्य किया जाए.
विदेशी रिसर्च में इस व्यवस्था से आधी रह गई मरने वालों की संख्या
चीफ फायर आफिसर एके मलिक के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई कई रिसर्च व विकसित देशों के आंकड़े यह साबित करते हैं कि जहां मकानों में फायर अलार्म व स्प्रिंकलर अनिवार्य हैं, वहां आग से होने वाले जान-माल के नुकसान में भारी कमी आई है. यदि दिल्ली सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर कानूनन लागू करती है तो आग लगने की घटनाओं में मरने वालों की संख्या 50 प्रतिशत तक कम हो सकती है.
एके मलिक का कहना है कि इसके पीछे की वजह बेहद व्यावहारिक है. जैसे ही घर के किसी हिस्से में आग या धुआं पैदा होगा, फायर डिटेक्टर का तेज अलार्म सोते हुए लोगों को भी तुरंत जगा देगा. इससे उन्हें सुरक्षित बाहर निकलने का कीमती समय मिल जाएगा. इसके साथ ही ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम तुरंत सक्रिय होकर पानी की बौछार शुरू कर देगा. इससे या तो आग शुरुआती दौर में ही पूरी तरह बुझ जाएगी या फिर फायर ब्रिगेड के पहुंचने तक काबू में रहेगी, जिससे वह विकराल रूप नहीं ले पाएगी.
राजधानी में आग में राख हो रहीं जिंदगियां
राजधानी दिल्ली में रोजाना 110 से अधिक आग लगने की काल दिल्ली फायर सर्विस को प्राप्त हो रही हैं. इस साल आग की दर्दनाक घटनाओं ने कई हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया है. दिल्ली फायर सर्विस के आंकड़ों के अनुसार, इस साल 1 जनवरी से 3 जून 2026 तक सीधे तौर पर आग की लपटों में घिरने के कारण 66 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, 3 जून को मालवीय नगर के फ्लोरिस स्टे होटल में आग लगने की घटना में 22 लोगों की जलकर मौत हो गई थी.
आग लगने पर मौत की ज्यादातर घटनाओं में यही पाया गया है कि लोगों को आग लगने की जानकारी समय से नहीं मिली और आग में जलकर या धुएं से दम घुटने के कारण मौत हो गई. दिल्ली जैसे घने व पुराने बसे शहर में इस योजना को लागू करना एक बड़ी चुनौती होगी. पुरानी दिल्ली के संकरे इलाकों व अनधिकृत कॉलोनियों में मौजूदा बुनियादी ढांचे के भीतर इन उपकरणों को फिट करना व लोगों को इसके खर्च व महत्व के प्रति जागरूक करना सरकार के लिए सबसे बड़ा काम होगा. लेकिन, नागरिकों की सुरक्षा व अमूल्य मानव जीवन के सामने यह चुनौतियां बौनी हैं.
दिल्ली फायर सर्विस की यह पहल न सिर्फ दिल्ली को एक आधुनिक व सुरक्षित वैश्विक शहर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि यह देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक बेहतरीन मॉडल साबित हो सकती है. यदि सरकार इस योजना को हरी झंडी देती है, तो आने वाले समय में हर घर सुरक्षित का सपना हकीकत में बदल जाएगा.
